सरकारी हेलीकॉप्टर बीमा मामले में सख्त कार्रवाई, Oriental Insurance तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट

रायपुर, 7 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन ने शासकीय हेलीकॉप्टर के बीमा दावे के लंबे समय तक लंबित रहने के मामले में The Oriental Insurance Company Limited (OICL) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। विमानन संचालनालय ने कंपनी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
मामला मई 2022 में रायपुर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हुए राज्य शासन के हेलीकॉप्टर से जुड़ा है। हेलीकॉप्टर का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था और बीमा प्रीमियम का भुगतान शासन की ओर से किया गया था। दुर्घटना के बाद राज्य सरकार ने बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने इसे चार वर्ष से अधिक समय तक लंबित रखा और अगस्त 2026 में दावा अस्वीकार कर दिया।
चार साल से अधिक की देरी पर शासन ने जताई आपत्ति
विमानन संचालनालय द्वारा मामले की समीक्षा में सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े बीमा दावे के निराकरण में हुई देरी को गंभीरता से लिया गया। शासन के अनुसार शासकीय हेलीकॉप्टर सार्वजनिक संपत्ति है और इसके बीमा में सार्वजनिक धन का उपयोग हुआ है। ऐसे मामलों में दावों का समयबद्ध निपटारा शासन के वित्तीय हितों से सीधे जुड़ा है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि शासन के साथ कार्य करने वाली सेवा प्रदाता संस्थाओं से संविदात्मक जिम्मेदारियों का समय पर निर्वहन अपेक्षित है। सार्वजनिक दावों को लंबे समय तक लंबित रखने से सरकारी वित्तीय हित प्रभावित हो सकते हैं।
ब्लैकलिस्ट करने से पहले कंपनी को मिला जवाब का मौका
विमानन संचालनालय ने कार्रवाई से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया। कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बाद ओरिएंटल इंश्योरेंस ने अपना लिखित जवाब प्रस्तुत किया और उसे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया।
कंपनी के पक्ष, उपलब्ध अभिलेखों और मामले से जुड़े तथ्यों का परीक्षण करने के बाद विमानन संचालनालय ने कारणों सहित आदेश जारी किया और कंपनी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया।
बीमा राशि की वसूली के लिए कार्रवाई जारी रहेगी
कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद बीमा दावे का मामला समाप्त नहीं हुआ है। राज्य शासन अपने दावे की राशि प्राप्त करने के लिए आगे भी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई जारी रखेगा। अधिकारियों के अनुसार सार्वजनिक धन की सुरक्षा और राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस कार्रवाई के जरिए राज्य शासन ने सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी धन से जुड़े मामलों में समयबद्ध जवाबदेही पर जोर दिया है।

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