सक्ती-रायपुर। सक्ती जिले के नवा बाराद्वार तहसील में संचालित अन्नपूर्णा राइस मिल के संचालक पर सरकारी जमीन कब्जाने और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने इस मनमानी के खिलाफ जिला कलेक्टर (DM) से लिखित शिकायत कर रसूखदार मिल संचालक पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
🛑 रसूख के बल पर सरकारी नहर और आम रास्ते पर कब्जा
शिकायत पत्र के अनुसार, अन्नपूर्णा राइस मिल के संचालक ने अपने निजी व्यावसायिक लाभ के लिए सारे कायदे-कानून ताक पर रख दिए हैं:
नहर पर अतिक्रमण: किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए बनी ‘पलाही सब-माइनर नहर’ की शासकीय भूमि पर मिल संचालक ने अवैध कब्जा कर लिया है और वहां राइस मिल से संबंधित काम किया जा रहा है।
पारंपरिक रास्ता बंद: मिल संचालक ने सरकारी भूमि को अपनी जागीर समझते हुए स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के आने-जाने वाले पारंपरिक मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है और उसे अपना निजी रास्ता बना लिया है।
🤢 नहर में बह रहा है उसना मिल का ‘जहरीला पानी’, बीमार हो रहे ग्रामीण
राइस मिल से होने वाले प्रदूषण ने आसपास के ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है:
मिल से निकलने वाला जहरीला, बदबूदार और उसना मिल का गंदा अपशिष्ट (Waste) पानी सीधे सिंचाई नहर में बहाया जा रहा है।
इस वजह से नहर का पानी इतना दूषित हो चुका है कि वह न तो इंसानों के काम आ रहा है और न ही मवेशियों के पीने लायक बचा है।
दूषित जल के कारण आसपास के गांवों में गंभीर संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है। मिल संचालक के रसूख के कारण स्थानीय लोग खुलकर विरोध करने से डरते हैं।
🗣️ “अधिकारियों की सुस्ती से बढ़ा आक्रोश” — क्रान्ति सेना
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के प्रदेश प्रमुख (RTI विंग) जितेन्द्र कुमार साहू ने बताया:
“इस संबंध में पहले भी स्थानीय स्तर पर मौखिक शिकायतें की गई थीं। लेकिन मिल संचालकों के कथित ऊंचे संपर्कों के कारण अधीनस्थ अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। प्रशासन की इसी सुस्ती और ढुलमुल रवैये के कारण आज क्षेत्र के किसानों और आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।”
📋 कलेक्टर (DM) से की गई मुख्य मांगें:
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने सक्ती कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
संयुक्त जांच और सीमांकन: सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर संबंधित खसरा नंबरों की तत्काल सरकारी नापी (सीमांकन) कराई जाए।
अतिक्रमण मुक्त हो रास्ता: शासकीय नहर की भूमि से अवैध कब्जे को तुरंत हटाकर आम जनता के लिए सार्वजनिक रास्ता बहाल किया जाए।
प्रदूषण पर कार्रवाई: पर्यावरण संरक्षण मंडल के नियमों की धज्जियां उड़ाकर नहर में गंदा पानी बहाने पर मिल संचालक के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि सुशासन का दावा करने वाला जिला प्रशासन इन रसूखदारों पर कानूनी हंटर चलाता है या अन्नपूर्णा राइस मिल का यह अवैध खेल यूं ही जारी रहता है।

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