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कोरबा: भाजयुमो पाली की ‘संशोधित सूची’ पर रार, मंडल को बिना बताए जिला संगठन के फैसले पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा-पाली। किसी भी राजनीतिक संगठन की मजबूती का आधार शीर्ष नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच का आपसी तालमेल होता है। लेकिन, जब यह तालमेल मनमानी में बदल जाए, तो संगठन के भीतर खींचतान और असंतोष का उभरना तय है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कोरबा जिले में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। जिला संगठन द्वारा हाल ही में लिए गए कुछ फैसलों के बाद अंदरूनी कलह और गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है।

ताजा मामला पाली भाजपा मंडल का है, जहां मंडल अध्यक्ष और भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के मंडल अध्यक्ष को पूरी तरह अंधेरे में रखकर जिला संगठन ने रातों-रात संशोधित सूची जारी कर दी है।

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📅 क्या है पूरा विवाद? (20 अप्रैल बनाम 30 मई)

20 अप्रैल 2026 की मूल सूची: प्रदेश संगठन के निर्देश पर भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी के अनुमोदन, भाजयुमो जिलाध्यक्ष वैभव शर्मा की अनुशंसा और पाली मंडल अध्यक्ष चंद्रशेखर पटेल व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष नीतिश कश्यप की सहमति से एक सूची जारी की गई थी। इस सूची से सभी संतुष्ट थे और काम सही चल रहा था।

30 मई को अचानक बदलाव: ठीक 40 दिन बाद, 30 मई को जिला संगठन के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर पाली भाजयुमो मंडल की एक नई संशोधित सूची अपलोड कर दी गई।

नाराजगी की मुख्य वजह: इस नई सूची को जारी करने से पहले न तो स्थानीय मंडल अध्यक्षों से कोई चर्चा की गई और न ही उनकी सहमति ली गई। इस फेरबदल में कई पदाधिकारियों के पद बदल दिए गए और एक सक्रिय पदाधिकारी को तो सीधे सूची से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

❓ संगठन की कार्यप्रणाली पर उठे ये 3 बड़े सवाल:

1. सक्रिय कार्यकर्ताओं को बाहर क्यों किया?

नियमत: पाली भाजयुमो मंडल में उपाध्यक्ष के 3 और मंत्री के 5 पद होने थे। लेकिन 20 अप्रैल की सूची में जिला संगठन ने गलती से 4 उपाध्यक्ष और 4 मंत्री घोषित कर दिए थे। अब इस संख्या को संतुलित (3 उपाध्यक्ष और 5 मंत्री) करने के चक्कर में एक सक्रिय उपाध्यक्ष को हटाने के बजाय उसे मंत्री बनाया जा सकता था, लेकिन उसे सीधे बाहर कर दिया गया। इससे कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है।

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2. क्या जिला संगठन मनमानी पर उतारू है?

आमतौर पर मंडल स्तर की नियुक्तियों में स्थानीय भाजपा और भाजयुमो मंडल का पूरा अधिकार और राय मायने रखती है। लेकिन जिला संगठन ने बिना किसी पूर्व प्रावधान या चर्चा के सीधे नाम बदल दिए। इससे पहले भी जिला स्तर पर सीनियर और प्रदेश स्तर के नेताओं की उपेक्षा की खबरें आई थीं, जिन्हें एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला तक में नहीं पूछा गया था।

3. एक तरफ गश्त, दूसरी तरफ असंतोष!

यह विरोधाभास तब सामने आ रहा है जब भाजपा जिला मंत्री और पाली मंडल प्रभारी श्रीमती कमला बरेठ संगठन को मजबूत करने के लिए दिन-रात क्षेत्र का दौरा कर रही हैं। ऐसे समय में जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी द्वारा स्थानीय टीम को भरोसे में लिए बिना लिया गया यह फैसला चुनावी तैयारियों को झटका दे सकता है, विशेषकर पाली-तानाखार विधानसभा सीट पर, जिसे जीतने के लिए भाजपा लंबे समय से संघर्ष कर रही है।

🗣️ जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते पदाधिकारी

नीतिश कश्यप (भाजयुमो मंडल अध्यक्ष): इनका कहना है कि जिला अध्यक्ष से चर्चा के बाद मामला ‘शॉर्टआउट’ हो गया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि बंद कमरों की चर्चा से उन सक्रिय कार्यकर्ताओं का दर्द दूर नहीं होगा जो लंबे समय से पद की आस में संगठन के लिए तन-मन-धन से जुटे हैं।

वैभव शर्मा (भाजयुमो जिला अध्यक्ष): उन्होंने गेंद पूरी तरह जिला भाजपा अध्यक्ष के पाले में डाल दी है। उनका कहना है कि “पूर्व में जिला संगठन से गलती से सूची घोषित हो गई थी, जिसे निरस्त कर जिला भाजपा द्वारा नई घोषणा की गई है। अधिक जानकारी के लिए भाजपा जिला अध्यक्ष से संपर्क किया जा सकता है।”

📉 निष्कर्ष: सांगठनिक मजबूती को लग सकता है झटका

चुनावी समर से पहले जिला और मंडल के बीच समन्वय का यह अभाव भाजपा के मिशन को कमजोर कर सकता है। अगर जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और जिला पदाधिकारियों की यह एकतरफा कार्यप्रणाली जारी रही, तो इसका सीधा असर संगठन की रीढ़ माने जाने वाले युवाओं के उत्साह पर पड़ेगा।

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प्रखर भूमि

प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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