कोरबा PHE विभाग में बवाल: SDO ने फोन पर दी हैंडपंप टेक्नीशियन को मां की गाली, ऑडियो चर्चा में; कबाड़ संसाधनों के भरोसे व्यवस्था!

कटघोरा/कोरबा। कोरबा जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की लचर प्रशासनिक व्यवस्था और अफसरों की तानाशाही का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। कटघोरा उप संभाग के एसडीओ (SDO) दाऊराम बंजारे ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए मात्र ₹8000 मानदेय पाने वाले एक हैंडपंप टेक्नीशियन (मिस्त्री) को फोन पर ‘साले’ कहते हुए मां की भद्दी-भद्दी गालियां दे दीं। पीड़ित कर्मचारी बेहद आहत है, वहीं इस घटना ने कागजी बैठकों में ‘सब ऑल इज वेल’ बताने वाले शीर्ष अधिकारियों की पोल खोलकर रख दी है।

📞 जानिए क्या है पूरा विवाद (गाड़ी-पाइप नहीं, काम कैसे हो?)

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

कर्मचारी पर ग्रामीणों का दबाव: पीड़ित टेक्नीशियन परमेश्वर कौशिक साल 2011 से विभाग में कार्यरत है। उसके अधीन 7 पंचायतों के 16 गांव (करीब 300 हैंडपंप) आते हैं। भीषण गर्मी और SECL खदान प्रभावित क्षेत्र होने के कारण वाटर लेवल गिर चुका है। दर्जनों हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं और ग्रामीण लगातार टेक्नीशियन को खरी-खोटी सुना रहे हैं।

अफसर का झूठा वादा: अप्रैल महीने में हुई विभागीय बैठक में SDO दाऊराम बंजारे ने वादा किया था कि हैंडपंप सुधार के लिए दो गाड़ियां और मजदूर दिए जाएंगे। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी 25 मई तक एक भी गाड़ी नहीं दी गई।

फोन किया तो भड़के SDO: 25 मई को जब टेक्नीशियन ने सब इंजीनियर अभिषेक विश्वकर्मा को फोन लगाया तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला। इसके बाद उसने SDO बंजारे को फोन कर अपनी मजबूरी बताई कि “गाड़ी, पाइप, रॉड, पाना-पेंचिस कुछ भी नहीं है, तो सुधार कैसे करूं? गाड़ी नहीं भेजनी थी तो बैठक में झूठ क्यों बोला?”

तू-तड़ाक और गाली-गलौज: इतना सुनते ही SDO बंजारे अपना आपा खो बैठे और तू-तड़ाक पर उतर आए। उन्होंने कर्मचारी को ‘साले’ बोलते हुए मां की गाली दे दी। जब कर्मचारी ने कहा कि बिना संसाधनों के वह काम नहीं कर पाएगा और उसे हटा दिया जाए, तो SDO ने अहंकार में कहा— “तुम नहीं रहोगे तो क्या PHE का काम रुक जाएगा!”

  सीएम साय ने किया 'स्वस्थ माता-तंदुरुस्त बच्चा' अभियान का शुभारंभ

🛠️ संसाधनों का टोटा: कबाड़ व्यवस्था की जमीनी हकीकत

कर्मचारी परमेश्वर कौशिक ने विभाग की पोल खोलते हुए बताया कि कटघोरा विकासखंड को 5 मुख्यालयों (बाता, कसईपाली, चाकाबुड़ा, रंजना और चारपारा) में बांटा गया है। हर जगह एक मिस्त्री है, जिन्हें हेल्पर की व्यवस्था भी खुद के खर्च पर करनी पड़ती है।

विभाग में इन चीजों की भारी किल्लत है:

❌ मरम्मत के लिए गाड़ियां नहीं हैं।

❌ नए पाइप और रॉड उपलब्ध नहीं हैं।

❌ सुधार कार्य के लिए पाना-पेंचिस (Tools) तक गायब हैं।

❌ मानव बल (मजदूरों) की भारी कमी है।

❌ मुख्य मिस्त्री शिबू कुमार यादव के पैर में रॉड लगी है, जिससे वे भारी काम करने में अक्षम हैं।

❓ बड़ा सवाल: बैठकों में ‘सब ओके’ तो जमीन पर कबाड़ क्यों?

इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

जब विभाग के पास गाड़ी, पाइप, रॉड और औजार तक नहीं हैं, तो SDO और बड़े अधिकारी जिला मुख्यालय की बैठकों में ‘सब कुछ ठीक है’ की झूठी रिपोर्ट कैसे पेश करते हैं?

यदि शासन को पत्र लिखा गया है, तो बजट और संसाधन अब तक क्यों नहीं मिले?

₹8000 की मामूली पगार पर गांवों में गालियां और दबाव झेल रहे छोटे कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज करने वाले ऐसे अधिकारियों पर उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करेंगे?

Live Cricket Info

प्रखर भूमि's avatar
About प्रखर भूमि 190 Articles
प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*


This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.