कोरबा। छत्तीसगढ़ में व्यापार करने आए मुंबई के एक सराफा कारोबारी के साथ कोरबा में प्रताड़ना का बड़ा मामला सामने आया है। पीड़ित व्यापारी पहले चोरी का शिकार हुआ, फिर पुलिस ने उसकी रिपोर्ट लिखने से इनकार कर दिया और बचे हुए माल को जीएसटी (GST) विभाग के चक्कर में फंसा दिया। अब केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों की मनमानी से तंग आकर छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है।
🚌 चलती बस से 10 किलो चांदी के जेवरात गायब
घटनाक्रम: मुंबई के व्यापारी संजय कुमार बाहेती गत 13 मई को करीब 23 किलो चांदी के जेवरात लेकर अंबिकापुर से बस द्वारा रायपुर जा रहे थे।
लापरवाही और चोरी: रात करीब 1 बजे कोरबा जिले के बांगो थाना क्षेत्र के एक होटल में बस रुकी। संजय जेवरातों से भरे 3 बैग सीट पर छोड़कर नीचे उतरे। वापस लौटने पर 2 बैग गायब थे, जिनमें करीब 10 किलो चांदी के जेवरात थे।
गुमराह करने का आरोप: पीड़ित का आरोप है कि बस ड्राइवर ने उसे गुमराह किया और किसी से बात नहीं करने दी।
🚔 पुलिस का अजीब रवैया: FIR दर्ज करने से इनकार, बचा हुआ माल किया जब्त
जब पीड़ित व्यापारी न्याय की गुहार लेकर बांगो थाने पहुंचा, तो पुलिस का संवेदनहीन रवैया सामने आया:
पुलिस ने व्यापारी से कहा कि ‘आपके पास कोई माल नहीं था, और अगर था भी तो चोरी आपने खुद की है।’
पुलिस ने 10 किलो चांदी की चोरी की एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की।
उल्टे, जो 12 किलो 377 ग्राम चांदी चोरी होने से बच गई थी, उसे पुलिस ने अपने पास रख लिया और मामले के कागजात जीएसटी ऑफिस भेज दिए।
💼 अब GST ऑफिस के चक्कर काटने को मजबूर, चैंबर ऑफ कॉमर्स ने दी चेतावनी
व्यापारी संजय बाहेती ने बताया कि सभी वैध दस्तावेज (Bills & Papers) जमा करने के बाद भी जीएसटी अधिकारी क्लीयरेंस नहीं दे रहे हैं और लगातार चक्कर लगवा रहे हैं।
मामला बढ़ता देख छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी और स्थानीय सराफा व्यापारी पीड़ित के समर्थन में आ गए हैं:
चैंबर ऑफ कॉमर्स के कोरबा जिला अध्यक्ष संतोष अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष जगदीश सोनी, सुभाष अग्रवाल और दिनेश सोनी सहित कई व्यापारी जीएसटी कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से तीखे सवाल-जवाब किए।
अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने पर व्यापारियों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और खरी-खोटी सुनाई।
व्यापारियों की चेतावनी:
चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों ने कहा कि सारे कागजात होने के बावजूद व्यापारी को परेशान करना यह दिखाता है कि छत्तीसगढ़ में व्यापारी सुरक्षित नहीं हैं। यदि मुंबई के व्यापारी को न्याय नहीं मिला और उसका माल वापस नहीं किया गया, तो कोरबा के व्यापारी उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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