छत्तीसगढ़ की माटी के गौरव और पंडवानी लोकगायन को सात समंदर पार पहचान दिलाने वाली पद्मविभूषण तीजन बाई का रविवार तड़के 3:15 बजे निधन हो गया। उनके अवसान से कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। इस कालजयी कलाकार का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव, दुर्ग जिले के गनियारी में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
🌟 कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति
पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने वाली तीजन बाई का जाना भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम युग का अंत है। एक साधारण पारधी परिवार में जन्मी तीजन बाई की जीवन-यात्रा साहस, कड़े संघर्ष और कला के प्रति अटूट समर्पण की एक प्रेरक महागाथा है।
📌 मुख्य बिंदु:
अंतिम संस्कार: दुर्ग जिले के पैतृक गांव गनियारी में, पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ।
वैश्विक पहचान: तंबूरे की झंकार से भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव दिलाया।
अदम्य साहस: संघर्षों की भट्टी में तपकर एक साधारण पृष्ठभूमि से विश्व पटल तक का सफर तय किया।
“तंबूरे की तान और बुलंद आवाज से महाभारत की कथाओं को जीवंत करने वाली तीजन बाई भले ही हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन लोककला के इतिहास में उनका नाम हमेशा अमर रहेगा।”

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