
रायपुर। कभी बस्तर के जंगलों में हथियार उठाने वाली महिलाएं अब हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में नई पहचान बना रही हैं। रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम में पूर्व महिला नक्सलियों ने पारंपरिक और हथकरघा से तैयार परिधानों में रैंप वॉक किया। उनके आत्मविश्वास से भरे अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया और पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
हथियार छोड़कर थामा हुनर का रास्ता
बस्तर की इन महिलाओं की जिंदगी में आया बदलाव अपने आप में एक बड़ी कहानी है। कभी नक्सली संगठन से जुड़कर जंगलों में हथियार उठाने वाली ये महिलाएं अब सामान्य जीवन की ओर लौट चुकी हैं। रैंप पर पारंपरिक परिधानों में उनका आत्मविश्वास यह संदेश देता नजर आया कि बदलाव की राह हमेशा खुली रहती है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में इन महिलाओं ने हथकरघा से तैयार कपड़े पहनकर रैंप वॉक किया। दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
रैंप पर दिखा आत्मविश्वास
रैंप वॉक के दौरान महिलाओं के चेहरे पर आत्मविश्वास और नई जिंदगी की उम्मीद साफ नजर आई। कभी जिनके हाथों में हथियार थे, वही हाथ अब हुनर और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी सिर्फ फैशन शो तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक बदलाव और पुनर्वास की एक तस्वीर भी बन गई। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाली महिलाओं को समाज में सम्मान और आत्मनिर्भरता का अवसर देने की कोशिशों का यह एक उदाहरण है।
बस्तर में बदलाव की तस्वीर
बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। सुरक्षा अभियानों के साथ सरकार की पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी की कोशिशों के बीच कई पूर्व नक्सली अब सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
रायपुर में हुआ यह आयोजन उसी बदलाव की एक अलग तस्वीर सामने लाता है। जंगलों में हथियार उठाने से लेकर शहर के मंच पर आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक करने तक का सफर इन महिलाओं के जीवन में आए परिवर्तन को दिखाता है।
VIDEO : पूर्व महिला नक्सलियों का रैंप वॉक
“रैंप वॉक का वीडियो देखें”

Live Cricket Info

Leave a Reply