नाना पाटेकर के निधन से शोक में डूबा सिनेमा जगत, CM साय बोले- कला और समाजसेवा के क्षेत्र में हमेशा याद किए जाएंगे

रायपुर। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है। 75 वर्षीय अभिनेता का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
नाना पाटेकर के निधन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने उन्हें भारतीय सिनेमा का दिग्गज अभिनेता, रंगमंच का विलक्षण कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी बताते हुए कहा कि उनके जाने से कला और सिनेमा जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
CM साय ने कहा- नाना पाटेकर की अपनी अलग पहचान थी
मुख्यमंत्री साय ने अपने संदेश में कहा कि नाना पाटेकर ने अपने अद्भुत अभिनय कौशल, सहज व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों के जरिए कला और समाजसेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी आवाज, संवाद अदायगी और किरदारों को जीवंत करने की क्षमता ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे अलग और प्रभावशाली कलाकारों में शामिल किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नाना पाटेकर का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यादगार रहेगा। उन्होंने दिवंगत अभिनेता की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार, प्रशंसकों और कला जगत से जुड़े लोगों को यह दुख सहने की शक्ति देने की कामना की।
नाना पाटेकर का निधन कला एवं सिनेमा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके अभिनय और सामाजिक सरोकारों की विरासत हमेशा याद की जाएगी।
करीब पांच दशक तक दर्शकों के दिलों पर किया राज
नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ रंगमंच पर भी अपनी खास पहचान बनाई। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘नटसम्राट’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले और पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था।
उनकी अभिनय शैली में संवादों की तीव्रता, भावनाओं की गहराई और किरदारों में पूरी तरह उतर जाने की क्षमता नजर आती थी। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य और मुख्यधारा की फिल्मों तक उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी।
अभिनय के साथ समाजसेवा में भी सक्रिय रहे
नाना पाटेकर केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। वे सामाजिक कार्यों से भी लंबे समय तक जुड़े रहे। उनकी सामाजिक सक्रियता और जरूरतमंदों के लिए किए गए कार्यों को भी उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देशभर की कई प्रमुख हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है।
एक अलग आवाज, एक अलग अंदाज और अमर किरदार
नाना पाटेकर का जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं, बल्कि अभिनय की एक ऐसी शैली का विदा होना है जिसे उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से विशिष्ट बनाया। पर्दे पर उनकी आवाज गूंजती थी तो किरदार अपनी पूरी ताकत के साथ सामने आ जाता था। उनके निभाए किरदार और संवाद आने वाले लंबे समय तक दर्शकों की स्मृतियों में जीवित रहेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नाना पाटेकर के निधन को भारतीय कला और सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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