KORBA BREAK: एनकेएच अस्पताल की कैथलैब सुविधा हृदय रोगियों के लिए वरदान; कोरबा में पहली बार 3 मरीजों में सफल एआईसीडी प्रत्यारोपण

अब रायपुर-बिलासपुर भागने की जरूरत नहीं, स्थानीय स्तर पर ही मिल रहा महानगरों जैसा उन्नत इलाज

मई माह में ही 17 एंजियोग्राफी और 12 एंजियोप्लास्टी सफल, जनवरी से अब तक सैकड़ों मरीजों को मिला जीवनदान

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कोरबा। शहर के प्रतिष्ठित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एनकेएच (NKH) में कैथलैब सुविधा शुरू होने के बाद से हृदय रोगियों को बड़े शहरों जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं अब स्थानीय स्तर पर ही मिलने लगी हैं। इसके चलते गंभीर मरीजों को रायपुर या अन्य महानगरों की ओर दौड़ नहीं लगानी पड़ रही है, जिससे सही समय पर इलाज मिलने से मरीजों की जान बचाना आसान हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन दिनों भीषण गर्मी, अनियमित खान-पान और बदलती जीवनशैली के कारण दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अक्सर लोग सीने में जलन, गैस, अपच और बेचैनी को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण साबित होते हैं। पिछले ही सप्ताह एनकेएच अस्पताल में ऐसे 15 से अधिक गंभीर मरीज पहुंचे, जिन्हें डॉक्टरों की विशेष निगरानी में तत्काल इलाज दिया गया।

कोरबा में पहली बार हुआ AICD प्रत्यारोपण:

रायपुर के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सतीश सूर्यवंशी और डॉ. एस.एस. मोहंती की टीम द्वारा मरीजों की सघन जांच की गई। इसके बाद 5 मरीजों की एंजियोप्लास्टी और 5 मरीजों की एंजियोग्राफी की गई, जबकि एक मरीज में सफलतापूर्वक पेसमेकर लगाया गया। अस्पताल के नाम एक बड़ी उपलब्धि तब जुड़ी, जब कोरबा के चिकित्सा इतिहास में पहली बार 3 मरीजों के शरीर में सफलतापूर्वक एआईसीडी (AICD – ऑटोमेटिक इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर) प्रत्यारोपित किया गया।

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क्या है एआईसीडी (AICD)?

यह एक छोटा और बेहद उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे मरीज की छाती में लगाया जाता है। यह दिल की धड़कनों पर 24 घंटे नजर रखता है। जैसे ही दिल की धड़कन खतरनाक रूप से अनियमित होती है या अचानक दिल काम करना बंद करने लगता है, यह मशीन स्वतः ही हल्का सा विद्युत झटका (Electric Shock) देकर दिल की धड़कन को सामान्य कर देती है। अचानक होने वाली कार्डियक अरेस्ट से मौत को रोकने के लिए यह तकनीक बेहद कारगर है।

आंकड़ों में एनकेएच कैथलैब की सफलता:

अस्पताल प्रबंधन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अकेले मई माह में ही इस कैथलैब में 17 मरीजों की एंजियोग्राफी, 12 मरीजों की एंजियोप्लास्टी और एक मरीज का पेसमेकर प्रत्यारोपण किया गया। वहीं जब से यह सुविधा शुरू हुई है, तब से लेकर अब तक एनकेएच में 400 से अधिक एंजियोग्राफी और 200 से ज्यादा सफल एंजियोप्लास्टी की जा चुकी हैं।

एनकेएच ग्रुप के डायरेक्टर डॉ. एस. चंदानी ने बताया कि जिले की पहली अत्याधुनिक कैथलैब शुरू होने से अब कोरबा में ही दिल की बीमारियों का पूरा और विश्वस्तरीय इलाज संभव हो गया है। इससे मरीजों का समय, पैसा और बड़े शहरों में होने वाली भागदौड़ तो बच ही रही है, साथ ही इमरजेंसी के मामलों में मरीज को तुरंत इलाज मिलने से बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं।

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