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प्रशासन के झूठे आश्वासन से फूटा गुस्सा: सर्वमंगला क्षेत्र के ग्रामीण 5 जून को करेंगे ‘सुशासन तिहार’ का विरोध, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

दो दिनों में मांगें पूरी न होने पर खैरभवना में शासकीय आयोजन के सामूहिक घेराव की चेतावनी

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रेलवे पुल ठेकेदार ने उजाड़ा था आस्था का केंद्र; तहसीलदार, एसडीएम और SECL के लिखित वादे भी निकले खोखले

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सोनपुरी नहर मार्ग पर उड़ रहे धूल के गुबार, स्कूली बच्चे परेशान और रोज हो रहे हादसे

कोरबा। सर्वमंगला मंदिर के समीप स्थित ऐतिहासिक प्राचीन रानी गुफा एवं हनुमान मंदिर के जीर्णोद्धार तथा क्षेत्र में फैले धूल-मिट्टी के साम्राज्य से त्रस्त ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे गया है। नाराज दर्जनों ग्रामीणों ने आज जिला प्रशासन और नगर पालिक निगम कोरबा को आंदोलन का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि दो दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आगामी 5 जून 2026 को खैरभवना में आयोजित होने वाले शासकीय ‘सुशासन तिहार’ का कड़ा विरोध और सामूहिक घेराव किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

दो साल पहले तोड़ा था मंदिर, अफसर सिर्फ बदलते रहे आश्वासन

ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन और आवेदन-निवेदन कर रहे हैं। दो वर्ष पूर्व रेलवे पुल निर्माण की ठेका कंपनी द्वारा क्षेत्र की आस्था के प्रमुख केंद्र रानी गुफा और हनुमान मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था। तत्कालीन पटवारी नम्रता राजवाड़े ने मौके का पंचनामा भी तैयार किया था। इसके बाद कई तहसीलदारों और तत्कालीन एसडीएम रोहित सिंह ने स्वयं मौके पर आकर जीर्णोद्धार का ठोस आश्वासन दिया, जो आज तक धरातल पर नहीं उतरा।

लिखित समझौता भी साबित हुआ खोखला

विवाद बढ़ने पर कटघोरा के वर्तमान एसडीएम तन्मय खन्ना, नहर विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच कटघोरा में एक आधिकारिक बैठक हुई थी, जिसमें स्थायी निराकरण का भरोसा मिलने पर ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित किया था। इसके बावजूद प्रशासन उदासीन बना रहा। दोबारा आंदोलन करने पर एसईसीएल (SECL) कुसमुंडा के अधिकारियों, सर्वमंगला चौकी प्रभारी और स्थानीय पार्षद ने 23 दिसंबर 2024 को बाकायदा लिखित आश्वासन पत्र देकर एक सप्ताह के भीतर सड़क से धूल साफ करने और पानी टैंकरों से छिड़काव का वादा किया था, लेकिन वह वादा भी आज तक खोखला साबित हुआ।

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धूल के गुबार से राहगीर परेशान, रोज हो रही दुर्घटनाएं

सर्वमंगला मंदिर से सोनपुरी नहर मार्ग पर पिछले दो वर्षों से भारी मात्रा में धूल-मिट्टी जमा है। इस मार्ग का उपयोग पाली, पडनिया, सोनपुरी, खैरभवना, कनबेरी, जटराज, भलपहरी, जपेली, तरदा, भादा और रिस्दी सहित दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीण प्रतिदिन कोरबा शहर आने-जाने के लिए करते हैं। सड़क पर उड़ने वाली अत्यधिक धूल के कारण दृश्यता (Visibility) शून्य हो जाती है, जिससे स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं।

जब जनता धूल खाने को मजबूर, तो किस बात का सुशासन तिहार?

ग्रामीण शिवरतन (पडनिया), टिकेश्वर (जटराज), संदीप (पाली), जागेश्वर (खैरभवना), विमल (कनबेरी) और संतोष (सोनपुरी) का कहना है कि जब क्षेत्र में आस्था के केंद्रों को उजाड़ दिया गया है और जनता धूल के गुबार में जीने को मजबूर है, तो प्रशासन किस बात का ‘सुशासन तिहार’ मना रहा है? ग्रामीणों ने इस बार आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और इस ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव (छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर) को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की है।

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प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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