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102 एंबुलेंस की सुविधा पर सवालः अस्पताल पहुंचने से पहले पेड़ के नीचे हुआ महिला का प्रसव

कोरबा 18 अगस्त। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए संचालित 102 एंबुलेंस सेवा को लेकर कोरबा जिले के पसान क्षेत्र से गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बाघिनडांड़ गांव में प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही पेड़ के नीचे प्रसव कराना पड़ा। इसके बाद परिजनों को करीब 2 हजार रुपये खर्च कर निजी वाहन से महिला और नवजात को अस्पताल ले जाना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, पंडरीपानी पंचायत के बांधापारा गांव की मितानिन को बाघिनडांड़ निवासी गर्भवती महिला के परिजनों ने प्रसव पीड़ा तेज होने की जानकारी दी। मितानिन ने तत्काल 102 एंबुलेंस सेवा को फोन किया। बताया गया कि एंबुलेंस गांव तक पहुंची, लेकिन महिला का घर मुख्य सड़क से करीब 400 मीटर अंदर दुर्गम रास्ते पर स्थित होने के कारण वाहन घर तक नहीं पहुंच सका।

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मितानिन का आरोप है कि उन्होंने एंबुलेंस कर्मियों से कुछ देर रुकने और महिला को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में मदद करने का आग्रह किया, लेकिन एंबुलेंस कर्मी इंतजार करने को तैयार नहीं हुए और वहां से चले गए। मितानिन के मुताबिक, बाद में उन्होंने एंबुलेंस चालक के निजी नंबर पर संपर्क किया तो चालक ने बताया कि वे वहां से निकल चुके हैं और अब वापस नहीं आ सकते। इसके बाद मितानिन और परिजन गर्भवती महिला को पैदल ही मुख्य सड़क की ओर ले जाने लगे।

इसी दौरान महिला की प्रसव पीड़ा और बढ़ गई। रास्ते में स्थिति गंभीर होने पर परिजनों और मितानिन को पेड़ के नीचे ही महिला का प्रसव कराना पड़ा। प्रसव के बाद महिला और नवजात को निजी वाहन से अस्पताल ले जाया गया, जिसके लिए परिवार को करीब 2 हजार रुपये खर्च करने पड़े।

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वहीं 102 एंबुलेंस के चालक अमर श्रीवास्तव ने मितानिन के आरोपों को गलत बताया है। चालक का कहना है कि महिला का घर पहाड़ के ऊपर था और रास्ता बेहद दुर्गम होने के कारण एंबुलेंस वहां तक नहीं जा सकती थी। चालक के अनुसार, उन्होंने नाले के पास करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार किया था। इसी दौरान रायपुर से भी इमरजेंसी कॉल आने लगे, जिसके कारण उन्हें वहां से रवाना होना पड़ा।

इस मामले में मितानिन और एंबुलेंस चालक के बयान में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है। मितानिन जहां एंबुलेंस के केवल 5 से 10 मिनट रुकने का दावा कर रही हैं, वहीं चालक करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बाघिनडांड़ गांव में 102 एंबुलेंस वास्तव में कितनी देर रुकी और महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए क्या प्रयास किए गए? मामले की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल अस्पताल पहुंचने से पहले महिला का रास्ते में प्रसव होना ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। वहीं निजी वाहन के लिए परिवार को अपनी जेब से करीब 2 हजार रुपये खर्च करने पड़े, जो आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवार के लिए बड़ी राशि है।

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प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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