कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के दीपका क्षेत्र में ठेका मजदूरों के शोषण का एक बड़ा मामला सामने आया है। ‘छत्तीसगढ़ कोयला मजदूर सेवा समिति दीपका’ और स्थानीय मजदूरों ने ठेका कंपनी व एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मांगों पर सुनवाई न होने से नाराज मजदूरों ने 30 मई 2026 से दीपका खदान की कन्वेयर बेल्ट लाइन को पूरी तरह जाम कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है।
इस संबंध में मजदूरों ने SECL के महाप्रबंधक (GM) समेत मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) कोरबा को लिखित अल्टीमेटम सौंप दिया है।
🔍 क्या हैं मजदूरों के मुख्य आरोप और समस्याएं?
मजदूरों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से ‘हेम्स एण्ड जे.एम.ए.टी.सी. एसोसिएट’ ठेका कंपनी ने यहाँ काम शुरू किया था। काम शुरू होने से पहले किए गए वादे धरातल पर खोखले साबित हो रहे हैं:
हाजिरी की चोरी (Attendance Tampering): मजदूरों का सबसे गंभीर आरोप है कि उनकी दैनिक हाजिरी (अटेंडेंस) काटी जा रही है, जिससे उन्हें पूरा पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है।
वेतन पर्ची (Pay Slip) का न मिलना: कामगारों को उनकी मेहनत का सही लेखा-जोखा यानी सत्यापित पे-स्लिप नहीं दी जा रही है।
आर्थिक शोषण: बुनियादी हकों और मौलिक अधिकारों से वंचित रखे जाने के कारण मजदूरों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है।
📋 मजदूरों की प्रमुख मांगें:
सत्यापित वेतन पर्ची: SECL और संबंधित ठेका कंपनी द्वारा सभी मजदूरों को हर महीने सत्यापित पे-स्लिप अनिवार्य रूप से दी जाए।
हाजिरी कार्ड की व्यवस्था: हाजिरी चोरी पर तुरंत रोक लगाई जाए और सभी कामगारों को सत्यापित हाजिरी कार्ड प्रदान किया जाए।
पूर्व समझौतों का पालन: कार्य प्रारंभ होने से पूर्व मजदूर प्रतिनिधियों के साथ किए गए सभी समझौतों और मजदूर हितों की मांगों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
⏳ 10 दिनों का अल्टीमेटम; नुकसान का जिम्मेदार होगा प्रबंधन
मजदूरों ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए 10 दिनों के भीतर उनकी सभी जायज मांगों को पूरा किया जाए।
चेतावनी: यदि तय समय सीमा के भीतर समाधान नहीं निकाला गया, तो 30 मई 2026 से मजदूर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस अनिश्चितकालीन हड़ताल और कन्वेयर बेल्ट ठप्प होने से होने वाले किसी भी प्रकार के कोयला उत्पादन व आर्थिक नुकसान की पूर्ण जिम्मेदारी ठेका कंपनी और SECL प्रबंधन (दीपका क्षेत्र) की होगी।

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