छत्तीसगढ़ में ईसाई और आदिवासी समुदाय पर हमले की निंदा वामदलों और केरल कांग्रेस (एम) के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

बजरंग दल को मिली खुली छूट, संविधानिक अधिकारों का हो रहा उल्लंघन

दुर्ग/रायपुर, छत्तीसगढ़ | छत्तीसगढ़ में ईसाई मिशनरियों और आदिवासी युवाओं पर कथित हमलों और झूठे आरोपों को लेकर राजनीतिक हलकों में रोष है। शुक्रवार को CPI(M), CPI और केरल कांग्रेस (एम) के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने झूठे मतांतरण के आरोपों में जेल में बंद ननों और आदिवासी युवती सुखमई मंडावी से मुलाक़ात की और इस घटना की कड़ी निंदा की।

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प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे:
के. राधाकृष्णन और ए. ए. रहीम (माकपा सांसद)
एनी राजा (सीपीआई नेता)
पी. पी. सुनीर (सीपीआई सांसद)
जोस के. मणि (केरल कांग्रेस एम सांसद)
बृंदा करात (नेता, माकपा)
क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ में हाल ही में कुछ ननों और आदिवासी युवती को धार्मिक रूपांतरण के झूठे आरोपों के तहत हिरासत में लिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को पुलिस की मौजूदगी में ननों को धमकाने और अपमानित करने की खुली छूट दी गई थी।

आरोप है कि सुखमई मंडावी समेत कुछ युवा आदिवासी महिलाओं को पीटा गया, गाली-गलौज की गई और उन्हें झूठे मुकदमों में फँसाया गया।

कोर्ट में भी उत्पात
बुधवार को जब ननों और सुखमई मंडावी की जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी, तब बजरंग दल के कार्यकर्ता कोर्ट परिसर में पहुँच कर नारेबाजी करने लगे ताकि जमानत मिलने में रुकावट डाली जा सके।

मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें निम्नलिखित मांगें शामिल हैं:
1. ननों और सुखमई मंडावी की बिना शर्त रिहाई
2. झूठे एफआईआर को तत्काल वापस लेना
3. हमलावर बजरंग दल कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी
4. छत्तीसगढ़ में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी

प्रतिनिधिमंडल की प्रतिक्रिया
CPI(M) नेता बृंदा करात ने कहा, “यह सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं, बल्कि संविधान पर सीधा हमला है। जब राज्य की पुलिस मूकदर्शक बन जाए, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है।”

CPI नेता एनी राजा ने कहा, “यह स्पष्ट है कि सरकार बजरंग दल को खुली छूट दे रही है, जिससे अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदाय लगातार निशाने पर हैं।”

यह घटना छत्तीसगढ़ में अल्पसंख्यक अधिकारों और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो देशव्यापी जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

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