जिला अस्पताल की नर्स ने बेच दिया आदिवासी बच्चे को, कलेक्टर ने निलंबित कर करवाया एफआईआर, और भी बच्चों की बिक्री की बात आई सामने



सुकमा। जिले के ज़िला अस्पताल में नवजात बच्चों की बिक्री करने का मामला सामने आया है। अस्पताल की ही स्टाफ़ नर्स के द्वारा नव जन्में बच्चों का सौदा जन्म से पहले ही कर लिया जाता था और जन्म के बाद गरीब माताओं को महज़ बीस तीस हज़ार रूपये का लालच देकर बच्चे की ख़रीदी कर ली जाती थी। और फिर उन बच्चों को अलग अलग लोगों को लाखों रूपये में बेच दिया जाता था।



मामला तब प्रकाश में आया जब सुकमा कलेक्टर हरिस एस. को
पुरे मामले की गुप्त शिकायत मिली कलेक्टर हरिस एस. मामले को गंभीरता से लेते हुए बाल संरक्षण इकाई सुकमा के अधिकारियों को पुरे मामले की पड़ताल करने का निर्देश दिया जिसके बाद पुरे मामले की जाँच के बाद पता चला की रामाराम ग्राम पंचायत की एक महिला से स्टाफ़ नर्स ने बच्चा ख़रीदा और किसी व्यक्ति को लाखों रूपये में बेच दिया गया वहीं नव जन्मे बच्चे की माँ को महज़ बीस तीस हज़ार रूपये देकर घर भेज दिया गया। वहीं जाँच के दौरान उक्त स्टाफ़ नर्स के द्वारा पूर्व में इसी तरह कई और बच्चों की ख़रीदी बिक्री की जानकारी मिली है, जिस पर जाँच जारी है। पुरे मामले के सामने आने के बाद कलेक्टर हरिस एस. के निर्देश पर बाल संरक्षण इकाई सुकमा के अधिकारियों ने उक्त स्टाफ़ नर्स के खिलाफ सुकमा कोतवाली में मामला दर्ज कराया गया है। साथ ही उक्त स्टाफ़ नर्स को तत्काल निलम्बित कर दिया गया है। नर्स पदमा नेताम ऐसे परिवारों को टारगेट बनाती थी जिसके दो से अधिक बच्चे हो।

सुकमा कलेक्टर हरीश एस को मिली गोपनीय सूचना से पूरे मामले का खुलासा हुआ। कलेक्टर ने बाल संरक्षण आयोग से पूरी रिपोर्ट मंगवाई और नर्स पदमा नेताम को निलंबित कर दिया। आंध्र प्रदेश और ओडिसा में भी बच्चों को बेचे जाने की बात सामने आई है।

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