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सेवा संकल्प अभियान- दम तोड़ते परंपरागत व्यवसाय को पीएम विश्वकर्मा योजना ने दी नई जिंदगी, कुम्हार रामकुमार की बढ़ी आमदनी

पहले पुराने चाक और सीमित आमदनी से जूझते थे, अब इलेक्ट्रॉनिक चाक और आधुनिक टूल से तेजी से तैयार कर रहे मिट्टी के बर्तन

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कोरबा 16 सितंबर 2026/ मिट्टी को आकार देकर घड़े, सुराही, दीये, गुल्लक और खिलौने बनाने की कला कुम्हार रामकुमार प्रजापति को विरासत में मिली है। कई पीढ़ियों से उनके परिवार की आजीविका इसी पारंपरिक व्यवसाय से चलती आई है। लेकिन बदलते समय के साथ जब इस कला को अपेक्षित बाजार और प्रोत्साहन नहीं मिला तो कभी रामकुमार को लगने लगा था कि जिस कुम्हारी कला को उन्होंने पीढ़ियों से संभालकर रखा है, शायद अब उससे नाता तोड़ना पड़ेगा। आज प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के सहयोग से उनके इसी पारंपरिक व्यवसाय को नई ऊर्जा मिली है और उनके मन में फिर से उम्मीद जगी है।

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पाली विकासखंड के ग्राम मादन निवासी रामकुमार प्रजापति बताते हैं कि पहले उनके पास मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए वही पुराना हाथ वाला चाक और औजार थे, जिनका उपयोग उनके दादा-परदादा किया करते थे। हाथ से चाक चलाने में अधिक मेहनत और समय लगता था। सीमित समय में कम संख्या में ही बर्तन तैयार हो पाते थे। आमदनी भी इतनी नहीं होती थी कि वे आधुनिक चाक और नए औजार खरीद सकें।

रामकुमार के लिए परेशानी उस समय और बढ़ गई, जब बाजार में सामान बेचने के दौरान तेज आंधी के कारण उनकी झोपड़ी क्षतिग्रस्त हो गई और उनका दायां पैर बुरी तरह चोटिल हो गया। इस घटना के बाद वे ठीक से खड़े होकर काम भी नहीं कर पा रहे थे। व्यवसाय में कम आमदनी और किसी तरह के प्रोत्साहन का अभाव उनके उत्साह को लगातार कम कर रहा था। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने कुम्हारी के पारंपरिक व्यवसाय को छोड़ने का मन बना लिया था।

फिर आया बदलाव का दौर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की जानकारी रामकुमार को मिली। उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया। उद्योग विभाग द्वारा उनके कार्य का चिन्हांकन किया गया और लाइवलीहुड कॉलेज में उन्हें एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान उन्हें स्टायफंड भी मिला। रामकुमार बताते हैं कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें 4 हजार रुपये की सहायता राशि मिली। इससे उन्हें यह भरोसा मिला कि सरकार उनके हुनर और मेहनत को पहचान रही है। योजना के तहत उनका पीएम विश्वकर्मा पहचान पत्र भी बनाया गया, जिसे वे अपने लिए नई पहचान और सम्मान का प्रतीक मानते हैं।

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अब रामकुमार के हाथों में पुराने चाक की जगह इलेक्ट्रॉनिक चाक और आधुनिक टूल किट है। इलेक्ट्रॉनिक चाक की मदद से वे कम मेहनत में पहले की तुलना में अधिक तेजी से मिट्टी के बर्तन तैयार कर पा रहे हैं। हाथ से चाक चलाने में जहां अधिक शारीरिक श्रम और समय लगता था, वहीं अब आधुनिक उपकरणों से काम आसान और गति तेज हो गई है। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ बाजार की मांग के अनुसार सामान तैयार करना भी संभव हो रहा है।

रामकुमार बताते हैं कि पहले एक दिन में सीमित संख्या में ही बर्तन तैयार हो पाते थे और शारीरिक मेहनत भी अधिक करनी पड़ती थी। अब इलेक्ट्रॉनिक चाक से काम आसान हो गया है और कम समय में अधिक सामान तैयार कर पा रहे हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से उन्हें बिना गारंटर ऋण सुविधा की जानकारी और अवसर भी मिला है। रामकुमार का कहना है कि इस सुविधा से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने, आवश्यक संसाधन जुटाने और कुम्हारी के काम को आधुनिक रूप देने का भरोसा मिला है। भविष्य में वे अपने काम का विस्तार कर अधिक मात्रा में मिट्टी के उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचने की योजना बना रहे हैं।
रामकुमार वर्तमान में पाली क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में अपनी दुकान लगाकर मिट्टी से तैयार सामान बेचते हैं। यही उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। वे कहते हैं कि जिस व्यवसाय को कभी छोड़ने का मन बना लिया था, उसी काम को अब नए उत्साह और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

रामकुमार प्रजापति प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि “पहले लगता था कि पुराने औजारों और कम आमदनी के कारण कुम्हारी का काम छोड़ना पड़ेगा। अब सरकार से प्रशिक्षण, औजार और आगे बढ़ने का अवसर मिला है। इससे अपने पुश्तैनी काम को नए तरीके से करने का हौसला मिला है।”

रामकुमार की कहानी बताती है कि पारंपरिक हुनर को यदि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी प्रोत्साहन का साथ मिल जाए तो पुरानी कला भी नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ सकती है। पहले जहां पुराने चाक, सीमित उत्पादन और कम आमदनी के कारण भविष्य अनिश्चित नजर आता था, वहीं अब आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग ने उनके हाथों के हुनर को नई रफ्तार और नई उम्मीद दी है।

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प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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