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SECL दीपका में आधुनिक बंधुआ मजदूरी: हेम्स कॉरपोरेशन पर ‘शॉर्ट अटेंडेंस’ के नाम पर करोड़ों के संगठित मजदूर घोटाले का आरोप!

पूरे महीने काम कराकर सिर्फ 10-12 दिनों का भुगतान; मलगांव मुआवजा घोटाले से भी बड़े भ्रष्टाचार की आशंका।

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कोरबा-दीपका:

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आजादी के अमृत काल में भी देश के प्रमुख औद्योगिक गढ़ कोरबा (छत्तीसगढ़) से श्रमिक शोषण का एक भयावह और आधुनिक चेहरा सामने आया है। SECL दीपका क्षेत्र के कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी ‘हेम्स कॉरपोरेशन’ पर लगभग 400 ठेका मजदूरों के आर्थिक और मानसिक शोषण का गंभीर आरोप लगा है।

श्रमिक आंदोलनों और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कंपनी ने ‘शॉर्ट अटेंडेंस’ (कम उपस्थिति) नामक एक नया तकनीकी और डिजिटल हथियार अपना रखा है। इस संगठित लूट के खिलाफ पीड़ित श्रमिकों ने हिम्मत दिखाते हुए SECL के महाप्रबंधक (GM) सहित तमाम सक्षम अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।

🚨 डिजिटल डकैती: 3 प्रमुख हथकंडे जिससे हो रहा शोषण

1. शॉर्ट अटेंडेंस का खेल

शिकायत के अनुसार, कोल हैंडलिंग प्लांट में करीब 400 मजदूर रात-दिन जान जोखिम में डालकर पूरे 26 से 30 दिन काम कर रहे हैं। परंतु, कागजों पर भारी हेराफेरी कर उन्हें केवल 10 से 12 दिनों की ही मजदूरी दी जा रही है। बाकी के दिनों का पैसा सीधे कंपनी की जेब में जा रहा है।

2. वेतन पर्ची (Pay Slip) देने से इंकार

इस बडे़ वित्तीय गबन को छिपाने के लिए मजदूरों को कानूनन मिलने वाली पेमेंट स्लिप (Pay Slip) तक नहीं दी जा रही है। मजदूरों ने अपने शिकायत पत्र में सैलरी स्लिप देने की मांग प्रमुखता से उठाई है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

3. SECL प्रबंधन की रहस्यमयी चुप्पी

चौंकाने वाली बात यह है कि SECL का कार्मिक (Personnel) और ई एंड एम (E&M) विभाग वर्षों से आंखें मूंदकर बैठा है। विभाग यह मानने को तैयार है कि मजदूर महीने में सिर्फ 12 से 15 दिन ही काम कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर अधिकारियों की संवेनहीनता या मिलीभगत को दर्शाता है।

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💰 मलगांव मुआवजा घोटाले से भी बड़े ‘महाघोटाले’ की आशंका!

पर्यावरण एवं SECL मामलों के जानकार शेत मसीह का कहना है कि दीपका क्षेत्र में पहले से ही मलगांव मुआवजा घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। लेकिन मजदूरों के पसीने की कमाई की यह चोरी और कोल हैंडलिंग प्लांट में चल रहा यह संगठित खेल, वित्तीय आकार में मलगांव घोटाले से भी बड़ा हो सकता है।

“यह निजी कंपनियों, भ्रष्ट अधिकारियों और स्थानीय कुछ स्वार्थी तत्वों (छुटभैया नेताओं) की त्रिकोणीय जुगलबंदी का नतीजा है, जो मजदूरों का खून चूस रहे हैं।”

— शेत मसीह, जानकार (SECL मामले)

🚂 कोयला संपदा की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। जो निजी कंपनियां अपने गरीब मजदूरों की हक की मजदूरी चुराने से बाज नहीं आ रहीं, उनके हाथों में देश की बेशकीमती कोयला संपदा और उसके परिवहन का संवेदनशील जिम्मा कितना सुरक्षित है? आशंका जताई जा रही है कि अधिकारियों से साठगांठ कर रात के अंधेरे में कोयले के बड़े खेल (चोरी/अफरा-तफरी) को भी अंजाम दिया जा रहा होगा।

⚖️ अब प्रशासन के पाले में गेंद: क्या मिलेगी न्याय की रोशनी?

ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति, किसान सभा और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना जैसे संगठनों द्वारा पैदा की गई जागरूकता के बावजूद निजी कंपनियों ने शोषण के नए डिजिटल रास्ते तलाश लिए हैं।

मजदूरों की इस लिखित शिकायत के बाद अब गेंद कोरबा जिला प्रशासन, कलेक्टर और श्रम विभाग के पाले में है। अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन इस पर समय रहते संज्ञान लेकर उचित दंडात्मक कार्रवाई करता है, या फिर बेबस और लाचार मजदूरों को न्याय के लिए एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

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प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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