खबर का असर : आनन-फानन में रद्द हुआ 20 लाख का बेडशीट टेंडर, पहले पांचों प्रतिभागी Disqualify फिर पूरी निविदा ही निरस्त !

कोरबा। आदिवासी विकास विभाग में 4,100 बेडशीट की करीब 20 लाख रुपये की खरीदी को लेकर किए गए खुलासे का असर अब दिखाई देने लगा है। जिस Limited टेंडर में पांच प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, उन सभी को पहले Technical Evaluation में Disqualify कर दिया गया और इसके बाद पूरी निविदा को ही निरस्त कर दिया गया।
बाबू ने रचा था खेल ?
मामला सामने आने के बाद अब विभागीय अधिकारी Technical Glitch का हवाला दे रहा है उनके मुताबिक टेंडर ओपन ही डाला था ये लिमिटेड कैसे हो गए जेम से क्यूरी कर रहे है। तकनीकी रूप से ये संभव नहीं है क्योंकि जेम में बिना कारण दर्शाए लिमिटेड बिड का ऑप्शन नहीं होता है हमारे पास मौजूद बिड डॉक्यूमेंट में भी अति आवश्यक कमेंट कर लिमिटेड बिड की आवश्यकता को पूरा किया गया है। यह कोई मानवीय भूल नहीं बल्कि बाबू और व्यापारी के नेक्सस का गठजोड़ सामने लाने जैसा है, या तो संबंधित बाबू ने इस ऑप्शन को चुनकर उसमें कारण दर्शाया है या फिर विभागीय आईडी किसी व्यापारी को दी गई थी जिसने पूरे टेंडर को अपलोड करने का काम किया है और बिना विभागीय अधिकारियों के जानकारी में लाये ये बवंडर कर डाला। दोनों ही सूरतों में यह गंभीर मामला है।
खास बात ये है कि लिमिटेड टेंडर करते समय विभाग को भाग लेने वाले पार्टिसिपेंट्स की जानकारी डालनी होती है जेम डॉक्यूमेंट के मुताबिक विभाग ने 4 लोगो की जानकारी डाली है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस खरीदी को विभाग ने तत्काल आवश्यकता बताते हुए Limited Tender के रास्ते आगे बढ़ाया था, वही प्रक्रिया अब बीच में ही खत्म हो गई। विभाग की इस कार्रवाई ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर पहले से उठ रहे सवालों को और गंभीर बना दिया है।
पहले पांचों को किया Disqualify, फिर टेंडर ही कैंसिल
4,100 बेडशीट की खरीदी के लिए विभाग ने करीब 19.96 लाख की अनुमानित लागत तय की थी। प्रक्रिया में पांच प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लेकिन Technical Evaluation में सभी पांचों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद पूरी निविदा को ही निरस्त कर दिया गया।
अब सवाल यह है कि अगर सभी पांचों प्रतिभागी तकनीकी रूप से अयोग्य थे तो उन्होंने भागीदारी क्यों की ? और अगर तकनीकी शर्तें पूरी नहीं हो रही थीं तो क्या Bid जारी करने से पहले विभाग ने अपनी ही तय शर्तों और पात्रता का ठीक से परीक्षण किया था ?
चहेता सप्लायर था तो फिर Disqualify क्यों ?
पूरी प्रक्रिया को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है। पहले आरोप उठे कि Limited Tender के जरिए प्रतिस्पर्धा को सीमित किया गया। अब जब पांचों प्रतिभागियों को Technical Evaluation में Disqualify कर दिया गया तो सवाल उठ रहा है कि अगर किसी खास या पसंदीदा सप्लायर को प्रक्रिया में लाभ पहुंचाने की मंशा थी, तो उसे भी तकनीकी रूप से अयोग्य क्यों घोषित करना पड़ा ? क्योंकि लिमिटेड टेंडर में अधिकतम 100 भागीदार ही शामिल हो सकते है जो कि खरीद करने वाले विभाग के पसंद के हों।
क्या विभाग ने टेंडर की शर्तें तय करते समय ही पात्रता का सही आकलन नहीं किया था? क्या प्रतिभागियों के दस्तावेजों की जांच के बाद यह स्थिति सामने आई? या फिर पूरी प्रक्रिया में ही कोई ऐसी तकनीकी खामी रह गई थी, जिसे बाद में सुधारने के बजाय टेंडर निरस्त करना पड़ा?
क्या बिना शर्तें पढ़े ही डाल दिया था टेंडर?
टेंडर निरस्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल विभाग की तैयारी पर है। जब विभाग को 4,100 बेडशीट की खरीदी करनी थी और इसके लिए लाखों रुपये का अनुमान तैयार किया गया, तो Bid जारी करने से पहले Technical Specifications और Eligibility Conditions का परीक्षण किस स्तर पर किया गया?
यदि पांचों प्रतिभागी तकनीकी शर्तों पर खरे नहीं उतर सके, तो क्या इसका मतलब यह नहीं है कि Tender Conditions और Ground Level Requirement के बीच कहीं न कहीं तालमेल की कमी थी?
और यदि विभाग का जवाब “Technical Glitch” है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर वह Technical Glitch क्या था, कब सामने आया और किस स्तर पर इसे चिन्हित किया गया?
Limited Tender की मंजूरी पर भी बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल Limited Tender को लेकर पहले ही उठाया जा चुका था। ATC के अंतिम पेज पर “अपर कलेक्टर सह अध्यक्ष महोदय द्वारा अनुमोदित” दर्ज है, लेकिन ATC में Limited Tender की स्पष्ट स्वीकृति का उल्लेख नहीं दिखाई देता। हमारी पड़ताल में मालूम हुआ कि इस संबंध में न तो कोई सक्षम स्वीकृति थी न ही किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को इस संबंध में कोई जानकारी ही थी, जिसने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली को संदिग्ध बना दिया है।
अब टेंडर निरस्त होने के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि GeM पर Limited Tender का विकल्प किस सक्षम स्वीकृति के आधार पर चुना गया था?
विभाग अब Technical Glitch का हवाला दे रहा है तो उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि यह Glitch ATC तैयार करते समय था, Bid Configuration के समय था या Technical Evaluation के दौरान सामने आया?
हमारे खुलासे के बाद अब पांच और टेंडर की बारी
यह मामला यहीं खत्म नहीं होने वाला। विभाग में इसी तरह Limited Tender के जरिए निकाले गए पांच और टेंडर भी जांच के दायरे में हैं। इन टेंडरों में किस आधार पर Limited Tender अपनाया गया, किस अधिकारी से मंजूरी ली गई और तत्काल आवश्यकता का आधार क्या बताया गया—इन सभी बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है।
एक-एक कर इन टेंडरों की फाइल और विभागीय प्रक्रिया सामने लाई जाएगी। सवाल सिर्फ एक बेडशीट टेंडर का नहीं है, बल्कि उस पूरी कार्यशैली का है जिसमें सरकारी खरीदी के लिए Limited Tender का रास्ता किस आधार पर चुना जा रहा है।
पहले खुलासा, फिर कार्रवाई—अब कई सवालों के जवाब बाकी
हमारे खुलासे के बाद टेंडर का निरस्त होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। यदि प्रक्रिया पूरी तरह सही थी तो फिर पांचों प्रतिभागियों को अयोग्य घोषित करने के बाद पूरी निविदा निरस्त करने की जरूरत क्यों पड़ी?
और यदि प्रक्रिया में वास्तव में तकनीकी खामी थी तो जिम्मेदारी किसकी थी? क्या इसकी जांच होगी? क्या नई निविदा में वही शर्तें रहेंगी? क्या इस बार Open Tender किया जाएगा या फिर Limited Tender का रास्ता दोबारा अपनाया जाएगा?
अभी और खुलासे बाकी हैं
बेडशीट टेंडर के निरस्त होने के बाद अब विभाग के सामने कई सवाल खड़े हैं। Limited Tender की मंजूरी, Technical Evaluation में पांचों प्रतिभागियों का Disqualification, टेंडर निरस्तीकरण का वास्तविक कारण और आगामी प्रक्रिया—इन सभी पर जवाब जरूरी है।
फिलहाल विभाग की ओर से Technical Glitch का हवाला दिए जाने की बात सामने आ रही है। लेकिन असली सवाल यह है कि जिस प्रक्रिया को तत्काल जरूरत बताकर शुरू किया गया, वह आखिर पांचों प्रतिभागियों को बाहर करने और पूरी निविदा निरस्त करने तक कैसे पहुंच गई?
यह सिर्फ एक टेंडर के कैंसिल होने की कहानी नहीं है। विभाग में Limited Tender के जरिए चल रही खरीदी की पूरी कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है। पांच और टेंडर की पड़ताल जारी है—एक-एक कर सामने आएगा कि किस टेंडर में क्या खेल हुआ और किस स्तर पर लापरवाही बरती गई।

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