मुख्यमंत्री साय के दिवाली पिटारे में छत्तीसगढ़ के जंगलों का खजाना, गिफ्ट बॉक्स बना चर्चा का विषय
महुआ, रागी के लड्डू, तिखुर, चिरौंजी से लेकर बस्तर की कला और मिट्टी के दीये तक शामिल; आदिवासी उत्पादों और स्थानीय कारीगरों को बाजार दिलाने की अनोखी पहल

रायपुर। दीपावली पर मिठाई और उपहार बांटने की परंपरा पुरानी है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का दिवाली गिफ्ट बॉक्स अपने अलग अंदाज के कारण चर्चा में है। इस पिटारे में महंगे ब्रांडेड सामान की जगह छत्तीसगढ़ के जंगलों, आदिवासी अंचलों और स्थानीय कारीगरों की मेहनत से तैयार उत्पादों को जगह दी गई है। इसे खोलने पर किसी को महुआ की खुशबू मिल रही है तो किसी को रागी के लड्डुओं और वन उत्पादों का देशी स्वाद आकर्षित कर रहा है।
महुआ से लेकर रागी तक, पिटारे में छत्तीसगढ़ी स्वाद
मुख्यमंत्री के इस खास गिफ्ट पैक में गोंद-रागी के लड्डू, महुआ से तैयार पकवान, महुआ टी-बैग, तिखुर पाउडर, इमली चपाती, रागी मिलेट लड्डू, जंगल में उपजी सरसों से तैयार तेल, काजू, चिरौंजी और महुआ नेक्टर पेय जैसे उत्पाद शामिल किए गए हैं। खास बात यह है कि इन उत्पादों में छत्तीसगढ़ के वनांचलों और स्थानीय संसाधनों की झलक दिखाई देती है।
यह पिटारा केवल स्वाद का संग्रह नहीं, बल्कि उन स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने की कोशिश भी है, जिन्हें अक्सर बड़े बाजार और ब्रांडेड कंपनियों के बीच पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। वन उत्पादों और पारंपरिक खाद्य सामग्री को आकर्षक पैकेजिंग के साथ प्रस्तुत कर उनकी बाजार में पहचान बनाने का प्रयास किया गया है।
जशपुर और बस्तर के आदिवासी अंचलों से जुड़ी उम्मीद
गिफ्ट बॉक्स में शामिल उत्पादों को जशपुर और बस्तर जैसे आदिवासी अंचलों में स्वरोजगार तथा स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने की पहल से जोड़कर देखा जा रहा है। जंगलों से मिलने वाले उत्पादों का प्रसंस्करण और उन्हें बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत होती है तो स्थानीय समुदायों के लिए आमदनी के नए अवसर बन सकते हैं।
इस पहल का महत्व इसलिए भी है कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में महुआ, इमली, चिरौंजी और दूसरे लघु वनोपज लंबे समय से आजीविका का आधार रहे हैं। इनसे तैयार उत्पादों को बेहतर पहचान और बाजार मिलने से स्थानीय उत्पादकों तथा महिला समूहों को भी लाभ की संभावनाएं बन सकती हैं।
कछुआ, डिजाइनर दीये और बस्तर की झलक
इस गिफ्ट पैक में केवल खाने-पीने की सामग्री ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कला और शिल्प को भी स्थान दिया गया है। अष्टधातु से निर्मित कछुए की कलाकृति, स्थानीय कुम्हारों द्वारा तैयार डिजाइनर मिट्टी के दीये और आदिवासी हस्तशिल्प इस पिटारे को खास बनाते हैं। इससे स्थानीय कारीगरों की कला को प्रोत्साहन देने का संदेश भी मिलता है।
गिफ्ट बॉक्स की पैकेजिंग भी आकर्षण का केंद्र है। इसके ऊपरी हिस्से पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तस्वीर और शुभकामना संदेश दिया गया है, जबकि पीछे की ओर बस्तर के प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात की तस्वीर छापी गई है। इसकी आकर्षक ढक्कननुमा डिजाइन को लोग यादगार के तौर पर सहेजने में भी रुचि दिखा रहे हैं।
स्वदेशी उत्पादों को ब्रांड बनाने की कोशिश
मुख्यमंत्री का यह दिवाली गिफ्ट पैक स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और स्थानीय कारीगरों तथा वन उत्पादों से जुड़े लोगों को व्यापक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक प्रतीकात्मक पहल के रूप में सामने आया है। आमतौर पर त्योहारों पर दिए जाने वाले उपहारों में बड़े ब्रांडों का दबदबा रहता है, लेकिन इस पिटारे में छत्तीसगढ़ की अपनी पहचान, परंपरा और स्थानीय हुनर को प्राथमिकता दी गई है।
राज्योत्सव और दीपोत्सव 2026 की शुभकामनाओं के साथ मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से नए और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लेने का संदेश भी दिया है। ऐसे में यह गिफ्ट बॉक्स केवल त्योहार की भेंट नहीं, बल्कि स्थानीय उत्पादों, आदिवासी कला और स्वदेशी अर्थव्यवस्था को पहचान दिलाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के इस दिवाली पिटारे में शामिल उत्पादों को क्या आने वाले दिनों में स्थायी बाजार और मजबूत ब्रांड पहचान मिल पाएगी ? यदि ऐसा होता है तो जंगलों में तैयार होने वाले ये उत्पाद छत्तीसगढ़ की पहचान के साथ स्थानीय परिवारों की आय का मजबूत जरिया भी बन सकते हैं।

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