पाली/कोरबा। पाली विकासखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में अव्यवस्थाओं और इलाज में देरी को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 28 मई की रात मरीज के परिजनों और अस्पताल स्टाफ के बीच जमकर तीखी बहस हुई। मामला इतना बढ़ा कि अस्पताल कर्मियों ने सुरक्षा का हवाला देकर हड़ताल कर दी, जिसके बाद पुलिस ने महिला स्टाफ की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। घटना में दीपका ब्लॉक युवा कांग्रेस अध्यक्ष सद्दाम की मौजूदगी और महिला स्टाफ को गलत तरीके से छूने (टच करने) के आरोपों के बाद मामला गरमा गया है।
🚨 घटनाक्रम: क्या है पूरा मामला?
मरीज की गंभीर हालत: ग्राम पंचायत नुनेरा निवासी सोहेल की अचानक तबीयत बिगड़ने और बेहोश होने पर परिजन उसे पाली CHC लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि मरीज करीब आधे से पौने घंटे तक बिस्तर पर अचेत पड़ा रहा, लेकिन ड्यूटी डॉक्टर या स्टाफ नर्स इलाज के लिए नहीं पहुंचे।
वीडियो बनाने पर बढ़ा विवाद: इलाज में देरी से परेशान परिजनों ने जब अस्पताल का वीडियो बनाना शुरू किया, तो स्टाफ ने कमियां छिपने के डर से वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया।
नेताओं की एंट्री और बहस: ईद की रात सोहेल के घर पहुंचे दीपका युकां ब्लॉक अध्यक्ष सद्दाम और एक अन्य जनप्रतिनिधि भी अस्पताल पहुंचे। अव्यवस्थाओं को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ी कि दोनों पक्षों में ‘औकात देखने’ और ‘देख लेने’ की धमकियां दी जाने लगीं।
‘टच’ करने का आरोप बनाम CCTV की दलील: महिला स्टाफ ने जब गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया, तो जनप्रतिनिधि ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का हवाला देते हुए आरोपों को अनर्गल बताया। मामले की सूचना मिलते ही बीएमओ डॉ. अनिल शराफ भी मौके पर पहुंचे।
🏥 वार्ड आया की रिपोर्ट पर FIR दर्ज
अगले दिन अस्पताल स्टाफ ने सुरक्षा का खतरा बताते हुए काम बंद कर हड़ताल कर दी। CHC पाली में वार्ड आया के पद पर कार्यरत अनिशा जगत (28 वर्ष) की शिकायत पर पुलिस ने धारा 132, 221, 296, 3(5)-BNS के तहत 3-4 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ जुर्म दर्ज कर लिया है।
शिकायत के मुख्य बिंदु: वार्ड आया के अनुसार, 28 मई की रात करीब 9:30 बजे 3-4 अज्ञात लोग शराब के नशे में ड्रेसिंग रूम में घुसे। उन्होंने इलाज में देरी का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की, महिला स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार किया, गलत तरीके से छुआ और हाथ उठाने की कोशिश की।
🧐 बड़ा सवाल: एकतरफा कार्रवाई और अव्यवस्थाओं का ज़िम्मेदार कौन?
अस्पताल में हंगामा होने पर एफआईआर होना लाजमी है, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है:
एकतरफा दबाव: पुलिस ने महिला स्टाफ की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए आरोपी पक्ष का मोबाइल जब्त कर लिया है, लेकिन कथित राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के कारण पीड़ित मरीज के परिजनों की तरफ से दुर्व्यवहार की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है।
अस्पताल की लापरवाही: क्या एक आया के भरोसे स्टाफ नर्स का काम लिया जा रहा था? गंभीर मरीज को आधे घंटे तक तड़पने के लिए छोड़ने वाले डॉक्टरों और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों पर कब संज्ञान लिया जाएगा और किसकी जवाबदेही तय होगी?

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