Chhattisgarh Journalist Attack News:–रामराज के दावे, गुंडों का राज महिलाएं, पत्रकार और आम नागरिक असुरक्षित सुशासन के दावे खोखले, कानून-व्यवस्था शून्य, सवाल उठ रहे

जब सच लिखना खतरा बन जाए पत्रकारों पर हमले और डर का माहौल राज्य के 10 जिलों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल


Chhattisgarh Journalist Attack News:–
छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर हो रहे हमले अब इक्कादुक्का घटनाएं नहीं रह गई हैं। बीते दो वर्षों में सामने आए मामलों से यह साफ होता जा रहा है कि भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार और प्रशासनिक अनियमितताओं पर सवाल उठाना प्रदेश में धीरेधीरे जान जोखिम में डालने जैसा बनता जा रहा है।

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Chhattisgarh Journalist Attack News:–
वर्ष 2024 से जनवरी 2026 के बीच राज्य के अलगअलग जिलों में पत्रकारों पर हमले की कम से कम 12 गंभीर घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें मारपीट, धमकी, कैमरा और मोबाइल तोड़ने, जबरन रिपोर्टिंग रुकवाने जैसी घटनाओं के साथ एक मामले में पत्रकार की हत्या तक शामिल है। ये घटनाएं सिर्फ व्यक्तिगत हमले नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सीधा सवाल हैं, जो सच सामने लाने वालों को सुरक्षित वातावरण देने में नाकाम दिखाई दे रही है।

रायपुर | 15 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ में बीते दो वर्षों के भीतर पत्रकारों पर हुए हमलों की श्रृंखला यह संकेत देती है कि राज्य में खोजी और सवाल पूछने वाली पत्रकारिता लगातार खतरनाक होती जा रही है। 2024 से जनवरी 2026 के बीच अलगअलग जिलों में सामने आई कम से कम 12 घटनाओं में पत्रकारों के साथ मारपीट, धमकी, उपकरणों की तोड़फोड़ और एक जघन्य हत्या की घटना दर्ज हुई है।

बीजापुर:– सड़क घोटाले की रिपोर्टिंग और पत्रकार की हत्या
जनवरी 2025 में बीजापुर जिले की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। फ्रीलांस पत्रकार मुकेश चंद्राकर कथित 120 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण घोटाले की पड़ताल कर रहे थे। आरोप है कि उन्हें डिनर पर बुलाकर लोहे की रॉड से हमला किया गया और बाद में शव को सेप्टिक टैंक में छिपा दिया गया।
इस मामले में एसआईटी जांच के बाद चार आरोपियों की गिरफ्तारी, चार्जशीट और अवैध निर्माण पर कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन इस घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल छोड़ दिए।

रायपुर:– राजधानी में भी पत्रकार सुरक्षित नहीं
राजधानी रायपुर में भी पत्रकारों के साथ टकराव की तीन अलगअलग घटनाएं सामने आईं।
मई 2025 में AIIMS अटल नगर परिसर में सवाल पूछने पर पत्रकारों के साथ कथित तौर पर बाउंसरों द्वारा दुर्व्यवहार किया गया।
अक्टूबर 2025 में एक सरकारी अधिकारी द्वारा पत्रकार से मारपीट का मामला सामने आया।
जनवरी 2026 में एक राजनीतिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के साथ हुए व्यवहार ने भी विवाद को जन्म दिया।

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राजनांदगांव, कबीरधाम और धमतरी:–
राजनांदगांव जिले में मनरेगा और अवैध रेत खनन से जुड़ी रिपोर्टिंग के दौरान एक स्थानीय पत्रकार पर हमला किया गया।
कबीरधाम में अवैध औद्योगिक गतिविधियों पर रिपोर्टिंग कर रही मीडिया टीम के साथ मारपीट कर मोबाइल छीनने की घटना सामने आई।
धमतरी जिले में वन विभाग से जुड़ी कथित अनियमितताओं की खबर चलाने के बाद एक पत्रकार को फोन पर धमकी मिलने की शिकायत दर्ज कराई गई।

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही:– पर्यावरण रिपोर्टिंग पर हमला
8 जनवरी 2026 में गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के मैकल-अमरकंटक क्षेत्र में स्टोन क्रेशर से जुड़े पर्यावरणीय उल्लंघनों की रिपोर्टिंग कर रहे दो पत्रकारों पर हमला हुआ। आरोप है कि हाईवा वाहन रोककर शीशा तोड़ा गया और मोबाइल छीन लिए गए। इस मामले में धनौली थाना में नामजद एफआईआर दर्ज की गई और पीड़ित पत्रकारों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।

कोई भी सुरक्षित नहीं हैं आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला

कुणाल शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन और रामराज के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो चुके हैं। प्रदेश में चारों ओर अराजकता और गुंडों का राज है, जहां महिलाएं, आम नागरिक और पत्रकारकोई भी सुरक्षित नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनव्यवस्था शून्य हो चुकी है और इसका मुख्य कारण यह है कि सरकार रायपुर से नहीं, बल्कि अहमदाबाद से संचालित की जा रही है। छत्तीसगढ़ को एटीएम नहीं, बल्कि पूरा बैंक समझ लिया गया है, जहां से संसाधनों का दोहन और जनता की सुरक्षा हाशिए पर चली गई है।

आंकड़े जो सच्चाई बयां करते हैं:
कम से कम 10 जिलों में पत्रकार हमलों की घटनाएं
लगभग 75% हमले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की रिपोर्टिंग से जुड़े
कई मामलों में कार्रवाई केवल एफआईआर तक सीमित
मीडियाकर्मी संरक्षण कानून मौजूद, लेकिन प्रभावी अमल नहीं

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