सरकार ने चाइल्ड केयर लीव बढ़ाने से किया मना, आईएएस सुजाता कार्तिकेयन ने किया ड्यूटी ज्वाइन, पति आईएएस से इस्तीफा दे बने है राजनेता,जाने क्यों चर्चाओं में है यह महिला आईएएस

 

 

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IAS Sujata Karthikeyan:– 2000 बैच की उड़ीसा कैडर की महिला आईएएस सुजाता कार्तिकेयन के चाइल्ड केयर लीव बढ़ाने के आवेदन को सरकार ने नामंजूर कर दिया है। जिसके बाद उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। वे पिछले पांच माह से अवकाश पर थी। उनके पति वीके पांडियन भी पूर्व आईएएस है और इस्तीफा देकर बीजद में शामिल हो गए थे। इस वर्ष जून माह में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजद की 24 वर्ष पुरानी सरकार को हराकर भाजपा सत्तारूढ़ हो गई। बीजद के चुनाव हारते ही वीके पांडियन ने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का करीबी माना जाता था।

 

IAS Sujata Karthikeyan:– आईएएस सुजाता कार्तिकेयेन की चाइल्ड केयर लीव बढ़ाने से उड़ीसा सरकार ने मना कर दिया है। इसके बाद उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। सन 2000 बैच की उड़ीसा कैडर की आईएएस सुजाता कार्तिकेय 6 माह से चाइल्ड केयर लीव पर थी। उन्होंने 27 नवंबर से 6 माह की अवकाश वृद्धि हेतु आवेदन दिया था जिसे उड़ीसा सरकार ने नकारते हुए उन्हें ड्यूटी ज्वाइन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उन्होंने ड्यूटी भी ज्वाइन कर ली है।

बता दे सन 2000 बैच की इस सुजाता कार्तिकेयन वर्तमान में वित्त विभाग में विशेष सचिव के पद पर पदस्थ हैं। उनके पति वीके पांडियन भी सन 2000 बैच के आईएएस हैं। वे बीजद सरकार में काफी प्रभावशाली माने जाते थे। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबियों में शुमार वीके पांडियन को बीजद और नवीन पटनायक का साथ इतना भाया कि उन्होंने आईएएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और बीजद में शामिल हो गए। इसी साल 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में 5 जून को घोषित नतीजों में बीजद की करारी हार हो गई और उड़ीसा में 24 साल के बीजद के शासन की उखाड़ कर भाजपा सत्तासीन हो गई।

ऐसा माना जाता था कि उड़ीसा में विधानसभा चुनाव बीजद नवीन पटनायक नहीं बल्कि वीके पांडियन के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है। पार्टी में पांडियन का कद इतना बड़ा हो गया था कि माना जाता था कि बीजद पार्टी और उड़ीसा सरकार पांडियन चला रहे है। जिसके चलते पांडियन हमेशा मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के निशाने पर रहे। नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली पिछली बीजद सरकार के कार्यकाल में भाजपा ने पांडियन की आईएएस पत्नी सुजाता कार्तिकेयन के खिलाफ कई शिकायत चुनाव आयोग में की थी। इस वक्त सुजाता कार्तिकेयन मिशन शक्ति विभाग में आयुक्त सह विशेष सचिव के पद पर तैनात थी। उनके खिलाफ भाजपा ने बीजद के एक सक्रिय नेता के रूप में चुनाव में सक्रिय रूप से भाग लेने का आरोप लगाया था।

दरअसल मिशन शक्ति विभाग में महिला स्व सहायता समूहों का सुपरविजन और उनको कार्यों की देखरेख करता है। मिशन शक्ति प्रोजेक्ट पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में शामिल था। यहां सुजाता कार्तिकेयन पिछले 6 साल से पोस्टेड थीं। मिशन शक्ति विभाग में कई परियोजनाएं चल रही है जिन्हें महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से संचालित करवाया जाता है। मिशन शक्ति विभाग से राज्य में 6 लाख स्व सहायता समूहों का संचालन और नियंत्रण किया जाता है। इसमें कुल 70 लाख महिला सदस्य है। आरोप था कि मिशन शक्ति में रहते सुजाता पांडियन इन 70 लाख महिलाओं को भाजपा का वोटर बनाने में जुटी थी। चूंकि उड़ीसा बीजेडी के प्रभावशाली नेता वीके पांडियन की पत्नी से जुड़ा मामला होने के चलते इन शिकायतों को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया और सुजाता कार्तिकेयन को मिशन शक्ति विभाग से हटाते हुए एक ऐसे गैर सार्वजनिक विभाग में स्थानांतरित कर दिया जो सीधे जनता के संपर्क में नहीं थी।

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हालांकि बाद में उन्हें वित्त विभाग की विशेष सचिव बनाया गया। इसी वर्ष 31 में को उन्होंने दसवीं में पढ़ने वाली अपनी नाबालिक बेटी की देख– रेख करने के लिए 6 माह की चाइल्ड केयर लीव ग्राउंड पर छुट्टी ली थी। तब बीजद की सरकार थी और सुजाता के पति वीके पांडियन सरकार में प्रभावशाली थे। लिहाजा तत्काल छुट्टी मंजूर हो गई।

5 जून को चुनाव के नतीजे घोषित हुए जिसमें बीजद बुरी तरह हार गई और राज्य में 24 साल बाद सरकार बदली। इस हार के लिए वीके पांडियन को ही दोषी ठहराया गया। इसके बाद उन्होंने पहले सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बना ली फिर सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी।

भाजपा की सरकार आने के बाद माना जा रहा था कि वीके पांडियन की पत्नी सुजाता कार्तिकेयन भाजपा सरकार के टारगेट में रहेंगी। अब भाजपा सरकार ने उनकी चाइल्ड केयर लीव एक्सटेंशन करने से मना कर दिया है। इसी वर्ष 31 मई से लंबी छुट्टी पर गई सुजाता कार्तिकेयन ने 4 नवंबर 2024 को सरकार को पत्र लिखकर 27 को खत्म हो रही छुट्टी फिर से 6 महीने तक के लिए बढ़ाने की मंजूरी मांगी थी। पर सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी करते हुए कहा कि सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद आपके बाल देखभाल अवकाश के आवेदन को विस्तार देने के लिए स्वीकार नहीं किया गया है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप कार्यभार ग्रहण करें। राज्य में बीजद की सरकार चले जाने और भाजपा की सरकार आने पर सत्ता और समीकरण बदलने के चलते सुजाता कार्तिकेयन ने बगैर ना नुकूर किए ड्यूटी ज्वाइन कर ली।

कौन है सुजाता कार्तिकेयन:–

सुजाता कार्तिकेयन 2000 बैच की उड़ीसा कैडर की आईएएस हैं। वे मूलतः उड़ीसा की रहने वाली है। पर उनके पिता बिहार में बस गए थे। 5 सितंबर 1975 को सुजाता का जन्म हुआ। सुजाता के पिता डॉक्टर अक्षय कुमार बिहार के प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ थे। बेटी के आईएएस बनने के सपने के चलते 1993 में सुजाता के पिता उन्हें लेकर दिल्ली आकर बस गए। सुजाता ने पहले बीए राजनीति शास्त्र में फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

2000 बैच की आईएएस सुजाता की ट्रेनिंग के दौरान अपने बैचमेट वीके पांडियन से आंखे चार हुई और दोनों का अफेयर शुरू हो गया। वीके पांडियन मूलतः तमिलनाडु के रहने वाले है। उनका जन्म 29 मई 1974 को हुआ है। उन्होंने एमएससी की डिग्री ली है। यूपीएससी चयनित होने के बाद वीके पांडियन को पहले पंजाब कैडर मिला था। पर पत्नी के उड़ीसा में पोस्टेड होने के आधार पर उन्होंने मैरिज बेस पर कैडर चेंज करवा के उड़ीसा करवा लिया।

सन 2001 में साइक्लोन के दौरान उत्कृष्ट कार्य करके नवीन पटनायक की नजरों में आए और तब से वे पटनायक के गुड बुक में शामिल हो गए। उनके करीबी बने फिर दस साल की नौकरी बाकी रहने के बावजूद आईएएस की सर्विस से इस्तीफा दे राजनीति में आ गए। बीजद की हार के साथ सक्रिय राजनीति से संन्यास भी ले लिया। पांडियन और कार्तिकेयन दंपत्ति की दो संताने है। उनकी बेटी का नाम नयनतारा कार्तिकेयन है,जिसकी दसवीं की परीक्षा की तैयारियां करवाने के लिए सुजाता कार्तिकेयन ने चाइल्ड केयर लीव लिया था।

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