
कोरबा। सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने वाले एक शिक्षक पर राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय संलिप्तता का आरोप भारी पड़ गया। कोरबा जिले के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कथरीमाल में पदस्थ शिक्षक एलबी प्रवीण कुमार डहरिया को संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कोरबा की जांच रिपोर्ट और शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत तस्वीरों के परीक्षण के बाद यह कार्रवाई की गई।
मामला केवल राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने तक सीमित नहीं बताया गया है। शिकायत में जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा नगर पंचायत क्षेत्र में प्रशासनिक एवं शासकीय कार्यों में अनधिकृत हस्तक्षेप करने का आरोप भी लगाया गया था। विभागीय जांच के बाद मामला संयुक्त संचालक कार्यालय तक पहुंचा, जहां से निलंबन का आदेश जारी किया गया।
किस शिकायत पर हुई कार्रवाई ?
प्रवीण कुमार डहरिया विकासखंड करतला के अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कथरीमाल में शिक्षक एलबी के पद पर पदस्थ थे। उनके खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहने और बलौदा नगर पंचायत क्षेत्र में प्रशासनिक एवं शासकीय कार्यों में अनधिकृत हस्तक्षेप करने की शिकायत की गई थी।
शिकायत मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा ने मामले की जांच कराई। इसके बाद जांच प्रतिवेदन के आधार पर शिक्षक के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर को भेजा गया। आदेश में शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत तस्वीरों के परीक्षण का भी उल्लेख है। विभाग के मुताबिक, जांच में राजनीतिक दल के कार्यक्रमों एवं गतिविधियों में शिक्षक की सक्रिय संलिप्तता सामने आई।
नियम 3 और 5 के उल्लंघन का हवाला
निलंबन आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 और 5 के उल्लंघन का हवाला दिया गया है। इन्हीं नियमों के आधार पर शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई। आदेश के मुताबिक, प्रवीण कुमार डहरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, करतला निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या है संदेश ?
इस कार्रवाई के बाद सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों और सेवा आचरण नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए निर्धारित आचरण नियमों का पालन करना आवश्यक है। हालांकि, किसी भी मामले में आरोप, जांच के निष्कर्ष और अंतिम विभागीय निर्णय के बीच अंतर समझना भी जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में निलंबन का आधार विभागीय जांच और राजनीतिक गतिविधियों में कथित सक्रिय संलिप्तता बताया गया है। शिक्षक का पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष या इस आदेश के संबंध में कोई आगे का आधिकारिक निर्णय उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

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