Agricultureछत्तीसगढ़🏙️ राज्य व शहर

धान कटाई के वक्त मौसम की मार का डर ! 27 से 30 अक्टूबर तक बारिश की आशंका, खेतों में खड़ी फसल बचाने किसानों की बढ़ी चिंता

सितंबर की बाढ़ के जख्म अभी भरे नहीं, अब बेमौसम बारिश की आशंका ने बढ़ाई परेशानी ; कटाई और मिंजाई की तैयारी में जुटे किसानों के सामने नई चुनौती

रायपुर | प्रखरभूमि

Advertisement Carousel
R.O. No. : 13952/ 36

छत्तीसगढ़ में धान कटाई का दौर नजदीक आने के साथ ही किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। खेतों में धान की फसल तैयार होने की ओर है और कई इलाकों में किसान कटाई की तैयारी में जुटे हैं। इसी बीच मौसम में संभावित बदलाव और 27 से 30 अक्टूबर के बीच बारिश की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सितंबर में भारी बारिश और बाढ़ की मार झेल चुके किसानों को अब डर है कि कहीं कटाई के समय मौसम फिर दगा न दे जाए।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

अखबार में प्रकाशित मौसम संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए मौसमी सिस्टम के कारण छत्तीसगढ़ सहित मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में 27 अक्टूबर से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने और 28 से 30 अक्टूबर के बीच कुछ क्षेत्रों में भारी से अतिभारी बारिश की आशंका का उल्लेख है। हालांकि, जिलेवार बारिश की स्थिति और इसकी तीव्रता के लिए मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी होगा।

खेतों में खड़ी फसल पर मंडराया खतरा

धान की फसल पकने के समय बारिश होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खेतों में पानी भरने, फसल गिरने और कटाई में देरी होने का खतरा रहता है। जिन किसानों ने धान काट लिया है, उनके लिए खुले में रखी फसल और खलिहान में रखे धान को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती हो सकती है। लगातार नमी बने रहने से कटे हुए धान के खराब होने और उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी रहती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों तक पहुंचने वाले रास्ते कीचड़ से भरने पर कटाई के बाद धान को घर या सुरक्षित भंडारण स्थल तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में संभावित बारिश का असर केवल खेतों में खड़ी फसल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कटाई, मिंजाई, परिवहन और उपज के भंडारण पर भी पड़ सकता है।

सितंबर की बारिश के बाद किसान दोहरी चिंता में

सितंबर में हुई लगातार बारिश ने प्रदेश के कई हिस्सों में जनजीवन और खेती-किसानी को प्रभावित किया था। निचले इलाकों में पानी भरने और खेतों में जलभराव जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। अब जब किसान खरीफ फसल को घर लाने की तैयारी कर रहे हैं, तब मौसम के दोबारा बिगड़ने की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दौरान मेहनत से तैयार की गई फसल की कटाई और सुरक्षित रखरखाव करना होता है।

  कानून में शव के साथ दुष्कर्म में नहीं है सजा, इसलिए हाई कोर्ट ने बच्ची के शव के साथ रेप करने वाले को नहीं दी सजा

यदि बारिश लंबी खिंचती है, तो कटाई का काम प्रभावित हो सकता है। वहीं, जिन खेतों में फसल पूरी तरह तैयार है, वहां किसान मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए कटाई की योजना में बदलाव कर सकते हैं। ऐसे हालात में स्थानीय कृषि विभाग और मौसम विभाग की सलाह किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

किसान अभी से करें तैयारी, खुले में न छोड़ें कटा धान

संभावित बारिश को देखते हुए किसानों को सलाह है कि वे मौसम का ताजा पूर्वानुमान देखकर ही कटाई और मिंजाई की योजना बनाएं। जहां धान पककर तैयार हो चुका है और कटाई संभव है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार काम आगे बढ़ाया जा सकता है। कटाई के बाद धान को खुले खेत या ऐसे स्थान पर न छोड़ें जहां बारिश का पानी जमा होने की आशंका हो।

कटी हुई फसल को सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर रखें तथा जरूरत पड़ने पर तिरपाल या अन्य जलरोधी सामग्री से ढकने की व्यवस्था करें। खेतों और खलिहानों से पानी की निकासी का इंतजाम भी पहले से कर लेना चाहिए। किसानों को गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए तथा प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना चाहिए।

मौसम के अगले अपडेट पर टिकी निगाहें

धान कटाई के महत्वपूर्ण समय में मौसम का मिजाज किसानों की मेहनत और उपज दोनों पर असर डाल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश की वास्तविक स्थिति पर सबकी नजर रहेगी। किसानों को घबराने के बजाय स्थानीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि विभाग की सलाह और खेतों की स्थिति के आधार पर तैयारी करने की जरूरत है, ताकि संभावित बारिश के बीच फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button