
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत काम करने वाले ठेकेदारों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। लंबे समय से भुगतान लंबित होने का आरोप लगाते हुए प्रदेशभर से राजधानी रायपुर पहुंचे ठेकेदारों ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। आधे कपड़ों में सड़क पर उतरकर लोगों से भीख मांगते ठेकेदारों ने अपने बकाया भुगतान की मांग उठाई। प्रदर्शन के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि काम पूरा करने के बाद भी भुगतान नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई है।
5 हजार करोड़ रुपये बकाया होने का दावा
ठेकेदारों का दावा है कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का करीब 5 हजार करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। उनका कहना है कि पाइपलाइन बिछाने से लेकर घरों तक नल के जरिए पानी पहुंचाने से जुड़े कार्य किए गए, लेकिन बिलों का भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ठेकेदारों के मुताबिक, निर्माण कार्यों में लगी पूंजी, मजदूरों का भुगतान, सामग्री की लागत और अन्य खर्चों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में भुगतान में देरी से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। हालांकि, बकाया राशि और भुगतान की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की ओर से होना बाकी है।
आश्वासन नहीं, अब भुगतान की समय-सीमा चाहिए
प्रदर्शन कर रहे ठेकेदारों ने मांग की है कि लंबित बिलों का जल्द निराकरण किया जाए और भुगतान के लिए स्पष्ट समय-सीमा घोषित की जाए। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि बकाया राशि जारी करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
ठेकेदारों का यह प्रदर्शन जल जीवन मिशन के कामकाज और भुगतान व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि बड़ी मात्रा में भुगतान लंबित है, तो इसका असर केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परियोजनाओं से जुड़े श्रमिकों और अन्य आपूर्तिकर्ताओं पर भी पड़ सकता है।
भाजपा कार्यालय के घेराव की चेतावनी
ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा। अगले चरण में भाजपा कार्यालय का घेराव करने की बात भी कही गई है। इससे आने वाले दिनों में भुगतान का मुद्दा और गरमा सकता है।
अब सरकार और विभाग के जवाब पर नजर
ठेकेदारों के प्रदर्शन के बाद अब सवाल यह है कि कथित बकाया भुगतान के निराकरण के लिए सरकार और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं। क्या लंबित बिलों की समीक्षा कर भुगतान का रास्ता निकाला जाएगा, या ठेकेदारों को आंदोलन तेज करना पड़ेगा ? फिलहाल ठेकेदारों ने अपनी मांगें सामने रख दी हैं। अब इस मामले में विभागीय पक्ष और आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार है।

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