
रायपुर | छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए इलाज से जुड़ी एक बड़ी राहत का रास्ता खुल गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में शासकीय सेवकों और उनके आश्रित परिवारजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। नई व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज के दौरान चिकित्सा खर्च का भुगतान अपनी जेब से करने और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी।
अस्पताल में भुगतान और बाद में प्रतिपूर्ति की परेशानी से मिलेगी राहत
अब तक इलाज के दौरान कई कर्मचारियों को पहले अपनी जेब से चिकित्सा खर्च उठाना पड़ता था और उसके बाद प्रतिपूर्ति के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती थीं। कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने से इस प्रक्रिया में बदलाव आने की उम्मीद है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार सूचीबद्ध अस्पतालों में कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारजनों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी।
इस व्यवस्था का महत्व गंभीर बीमारी और आपातकाल जैसी परिस्थितियों में और बढ़ जाता है, जब मरीज को तत्काल इलाज की जरूरत होती है और परिवार के सामने एक साथ बड़ी रकम जुटाने की चुनौती खड़ी हो सकती है। सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आर्थिक दबाव कम करने में मददगार हो सकता है।
ऑनलाइन होगी पूर्व-अनुमोदन और दावों की प्रक्रिया
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, नई व्यवस्था में पूर्व-अनुमोदन और चिकित्सा दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन तथा डिजिटल माध्यम से की जाएगी। इससे प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने और कागजी औपचारिकताओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, योजना के क्रियान्वयन, पात्रता, अस्पतालों की सूची और लागू होने की तारीख से जुड़ी विस्तृत जानकारी अलग से जारी किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कर्मचारियों के परिवारों को भी मिलेगा लाभ
इस निर्णय की खास बात यह है कि चिकित्सा सुविधा केवल शासकीय सेवकों तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि उनके आश्रित परिवारजनों को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे कर्मचारियों के परिवारों को इलाज के खर्च की व्यवस्था करने में राहत मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी देना सरकारी कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब इस फैसले का वास्तविक लाभ योजना के नियमों, अस्पतालों की उपलब्धता और जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

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