कानूनी लड़ाइयों ने बनाया और विनम्र, गौतम अदाणी बोले- भरोसा किसी भी कानूनी अधिकार से बड़ा

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस से पहले अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अपने सफर, कारोबारी चुनौतियों और भारत के विकास को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थितियां व्यक्ति के चरित्र को बदलती नहीं हैं, बल्कि उसे सामने लाती हैं। कानूनी चुनौतियों के दौर का जिक्र करते हुए अदाणी ने कहा कि इन घटनाओं ने उनके भीतर कानून के शासन और निष्पक्ष प्रक्रिया में भरोसा और मजबूत किया है।
16 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे थे गौतम अदाणी
गौतम अदाणी ने अपने संबोधन में अपने शुरुआती संघर्ष को याद किया। उन्होंने बताया कि महज 16 वर्ष की उम्र में वह काम सीखने और भविष्य बनाने के लिए मुंबई पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि आज जब देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा अपने परिवार और घर से दूर होकर अदाणी ग्रुप की परियोजनाओं में काम करने पहुंचते हैं, तो उनमें उन्हें अपना पुराना सफर दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि जिंदगी में पहला कदम सबसे कठिन और निर्णायक होता है। यही कदम आगे की दिशा तय करता है और व्यक्ति को परिस्थितियों से लड़ना सिखाता है।
कानूनी विवादों ने बढ़ाया कानून पर भरोसा
अदाणी ने अपने संबोधन में अमेरिकी अदालत से जुड़े मामले और हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों के बाद पैदा हुई परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन दौर ने उन्हें किसी जीत का जश्न मनाने के बजाय और अधिक विनम्र बनाया। उनके मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया ने कानून के शासन और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया में उनके विश्वास को और मजबूत किया।
उन्होंने मुश्किल समय में अदाणी ग्रुप के कर्मचारियों, कारोबारी साझेदारों और शुभचिंतकों के समर्थन के लिए आभार भी जताया। अदाणी के मुताबिक, संकट की घड़ी में साथ खड़े रहने वाले लोगों का भरोसा किसी भी संस्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
समुद्र मंथन का उदाहरण देकर समझाया संघर्ष
गौतम अदाणी ने भारतीय पौराणिक कथा समुद्र मंथन का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियां किसी व्यक्ति या संस्था के चरित्र का निर्माण नहीं करतीं, बल्कि पहले से मौजूद चरित्र को उजागर करती हैं। उन्होंने कहा कि कठिन समय में धैर्य, निष्पक्ष प्रक्रिया और सही रास्ते पर टिके रहना ही किसी संस्था की वास्तविक मजबूती को दर्शाता है।
20 हजार करोड़ रुपये के FPO का भी किया जिक्र
अदाणी ने अपने समूह के 20 हजार करोड़ रुपये के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर यानी FPO को वापस लेने के फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने भरोसे को कारोबारी सफलता से भी बड़ा बताते हुए कहा कि कानून अधिकार देता है, लेकिन उन अधिकारों का इस्तेमाल कब और किस तरह किया जाना चाहिए, यह मूल्यों और जिम्मेदारी से तय होता है।
मुश्किल दौर में भी कारोबार पर रहा फोकस
गौतम अदाणी ने कहा कि कानूनी और सार्वजनिक जांच के दौर में भी समूह ने अपने कारोबारी कामकाज पर ध्यान बनाए रखा। उन्होंने कहा कि इस अवधि में कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया और विभिन्न क्षेत्रों में समूह की गतिविधियां जारी रहीं।
खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क से जुड़े एक युवा इंजीनियर के साथ हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विकास का अर्थ केवल बड़े और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं है। विकास का असली मतलब उससे पैदा होने वाली उम्मीद और लोगों के जीवन में आने वाला बदलाव है।
‘विकसित भारत’ के निर्माण पर जोर
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के संदर्भ में अदाणी ने कहा कि यह समय केवल उपलब्धियों का जश्न मनाने का नहीं, बल्कि यह सोचने का भी है कि वर्तमान पीढ़ी आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी विरासत छोड़ना चाहती है।
उन्होंने अदाणी ग्रुप से जुड़े लाखों कर्मचारियों और साझेदारों से अपील करते हुए कहा कि लक्ष्य सिर्फ बड़े कारोबारी संस्थान खड़े करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी संस्थाओं का निर्माण होना चाहिए जो लंबे समय तक देश की प्रगति में योगदान दें और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को मजबूत करें।
गौतम अदाणी का संदेश साफ था—मुश्किल परिस्थितियां असली परीक्षा होती हैं और भरोसा, धैर्य तथा मूल्यों के साथ आगे बढ़ना ही किसी भी संस्था की सबसे बड़ी ताकत है।

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