आदिवासी विभाग में हो रहा बड़ा खेला ! 20 लाख की बेडशीट खरीदी सवालों के घेरे में, चहेते सप्लायर को उपकृत करने लिखी गई पटकथा ?

कोरबा। आदिवासी विकास विभाग में छात्रावास और आश्रमों के लिए होने वाली करीब 20 लाख रुपये की बेडशीट खरीदी अब सवालों के घेरे में है। मामला सिर्फ 4,100 बेडशीट की खरीदी का नहीं, बल्कि उस तरीके का है, जिससे यह पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। विभाग ने GeM के जरिए होने वाली इस खरीदी के लिए Limited Tender का रास्ता अपनाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन-सी तत्काल जरूरत पैदा हो गई कि खुली प्रतिस्पर्धा के बजाय सीमित दायरे में टेंडर करना जरूरी हो गया?
विभाग ने 4,100 बेडशीट की खरीदी के लिए 19,96,700 की अनुमानित लागत तय की है। यानी विभागीय अनुमान के अनुसार एक बेडशीट की कीमत करीब 487 रुपये बैठती है। हालांकि यह अभी अनुमानित दर है, वास्तविक खरीद दर Financial Bid खुलने के बाद ही सामने आएगी।
आखिर 4100 बेडशीट की ऐसी क्या तत्काल जरूरत पड़ी ?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल Limited Tender को लेकर है। GeM पर Limited Tender के पीछे तत्काल आवश्यकता को कारण बताया गया है। लेकिन दूसरी तरफ Bid जारी होने से लेकर बंद होने तक करीब 30 दिन का समय दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि जरूरत इतनी तत्काल थी तो प्रक्रिया के लिए पूरा एक महीना क्यों रखा गया?
यही नहीं, खुली प्रतिस्पर्धा की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा योग्य सप्लायरों को कीमत प्रतिस्पर्धा में शामिल होने का अवसर मिल सकता था। Limited Tender अपनाने से संभावित प्रतिस्पर्धियों का दायरा पहले ही सीमित हो जाता है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या इस प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को सीमित करने की जरूरत वास्तव में थी ?
‘बाबू’ पर उठ रहे सवाल, सूत्रों ने लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में विभागीय सूत्रों के हवाले से एक लिपिक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक विभाग में पदस्थ अमन राम, जिनके पास DMF और खरीदी से संबंधित काम का प्रभार बताया जा रहा है, की भूमिका Limited Tender की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रही है।
सूत्रों का दावा है कि अधिकारियों और क्रय समिति को पूरी जानकारी दिए बिना Limited Tender की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं होती है। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि Limited Tender का निर्णय किस अधिकारी या समिति ने लिया और उसकी लिखित स्वीकृति कहां है ? अमन राम को लेकर DMF से संबंधित पुराने विवादों और पूछताछ की चर्चा भी विभागीय स्तर पर होती रही है।
आयुष अग्रवाल को लेकर भी विभाग में चर्चाएं
इधर विभाग में पिछले कुछ समय से आयुष अग्रवाल को लेकर भी चर्चाएं होने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक खरीदी से जुड़े कुछ कार्यों में उनकी फर्म अथवा उनसे जुड़े सहयोगियों की कंपनियों के नाम सामने आते रहे हैं।
हालांकि इस बेडशीट टेंडर में किसी विशेष फर्म को लाभ मिला है या नहीं, यह अभी सामने नहीं आया है। इसका पता Technical Evaluation और इसके बाद खुलने वाली Financial Bid से ही चलेगा।
अपर कलेक्टर से ATC मंजूर, लेकिन Limited Tender का जिक्र कहां ?
टेंडर का ATC यानी Additional Terms & Conditions दस्तावेज भी इस मामले में खासा महत्वपूर्ण है। ATC के अंतिम पेज पर स्पष्ट रूप से लिखा है— “अपर कलेक्टर सह अध्यक्ष महोदय द्वारा अनुमोदित”। इसके नीचे सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग, कोरबा के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं।
लेकिन सवाल यह है कि इसी ATC में Limited Tender का स्पष्ट उल्लेख कहां है ? ATC के अंतिम हिस्से में GeM पर ATC डाउनलोड, Bid Submission, Negotiated Rates, Key Dates, Delivery, Payment और Tender Cancellation जैसी शर्तों का उल्लेख है, लेकिन Limited Tender को लेकर कोई स्पष्ट स्वीकृति दर्ज दिखाई नहीं देती।
ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा होता है— जब अपर कलेक्टर की मंजूरी में Limited Tender का निर्णय शामिल नहीं था ? तो GeM पर Limited Tender का विकल्प अलग स्तर पर क्यों तय किया गया ?
क्योंकि GeM Bid Details में Limited Tender को “Yes” दर्शाया गया है और उसके पीछे तत्काल खरीदी को कारण बताया गया है। ऐसे में Limited Tender की सक्षम स्वीकृति और उससे संबंधित नोटशीट सामने आना जरूरी हो जाता है।
क्या सीमित दायरे में पहले से तय था रास्ता ?
सरकारी खरीदी में प्रतिस्पर्धा जितनी व्यापक होती है, उतनी ही बेहतर दर मिलने की संभावना रहती है। ऐसे में Limited Tender के जरिए संभावित सप्लायरों का दायरा सीमित किए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यहां यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी Technical Evaluation का अंतिम परिणाम सामने नहीं आया है और Financial Bid भी नहीं खुली है। इसलिए किसी खास फर्म को फायदा पहुंचाने का निष्कर्ष अभी निकालना जल्दबाजी होगा। लेकिन Limited Tender की जरूरत, उसकी स्वीकृति और इसके पीछे की प्रक्रिया की जांच जरूर होनी चाहिए।
20 लाख की खरीदी, प्रति बेडशीट 487 का अनुमान
विभाग ने कुल 4,100 बेडशीट के लिए ₹19,96,700 की अनुमानित लागत तय की है। गणना के अनुसार यह करीब ₹487 प्रति बेडशीट बैठती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस अनुमानित दर का आधार क्या है? क्या विभाग ने Market Survey कराया? क्या पुराने सरकारी खरीद रिकॉर्ड से दरों की तुलना की गई? क्या किसी Rate Analysis के आधार पर यह कीमत तय हुई?
इन सवालों का जवाब Rate Analysis, Market Survey और पिछले खरीद रिकॉर्ड से ही सामने आ सकता है।
24 सितंबर को Technical Bid खुली, Evaluation का इंतजार
टेंडर की Bid 25 अगस्त 2026 को जारी हुई थी और इसकी अंतिम तारीख 24 सितंबर 2026 रखी गई थी। निर्धारित समय पर 24 सितंबर को Technical Bid खोल दी गई। लेकिन इसके बाद भी अंतिम Technical Evaluation सामने नहीं आया है।
यह देरी अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन जब पूरी खरीदी को “तत्काल आवश्यकता” बताकर Limited Tender का रास्ता अपनाया गया हो, तब Technical Evaluation की प्रक्रिया पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
सवाल बड़ा है, जवाब विभाग को देना होगा
4100 बेडशीट की करीब 20 लाख रुपये की खरीदी में फिलहाल सबसे बड़े सवाल यही हैं— आखिर Limited Tender क्यों ? तत्काल जरूरत का आधार क्या था? इसकी सक्षम स्वीकृति कहां है? ATC में इसका उल्लेख क्यों नहीं है? और 487 की अनुमानित दर किस आधार पर तय की गई?
Technical Evaluation और Financial Bid के बाद ही यह साफ होगा कि इस प्रक्रिया में वास्तव में किसे फायदा हुआ और सरकारी खजाने पर इसका क्या असर पड़ा। फिलहाल दस्तावेजों से उठे सवालों ने विभाग की इस खरीदी को जरूर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

Live Cricket Info