
नई दिल्ली। ब्रिटिश शासन के दौरान सिख साम्राज्य से छीनी गई 300 साल पुरानी गुरुग्रंथ साहिब की हस्तलिखित प्रति अब स्कॉटलैंड के सेंट्रल गुरुद्वारे को सौंप दी गई है। ग्लासगो में श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकेंगे। यह विरासत कभी सिख साम्राज्य के दूसरे शासक महाराजा खड़क सिंह की थी। अंग्रेजों ने इसपर कब्जा जमा लिया था। यह पांडुलिपि 1700 के दशक में लिखी गई थी। 1848 में अंग्रेजों ने पंजाब के दुलेवाला किले पर कब्जा किया था। उसी दौरान यह पांडुलिपि महाराजा खड़क सिंह के अभिलेखागार से अपने कब्जे में ले ली थी।
कोहिनूर लेने वाले अफसर को मिली थी
यह पांडुलिपि सिख साम्राज्य से सर जॉन स्पेंसर लॉगिन के पास पहुंची। स्पेंसर वही अधिकारी थे जिन्होंने सिख साम्राज्य से कोहिनूर हीरा लेकर महारानी विक्टोरिया को सौंपा था। बाद में उन्होंने इस हस्तलिखित विश्वविद्यालय को दे दिया था। यह कई वर्षों तक विश्वविद्यालय के अभिलेखागार में रखी गई।
अनजाने में वेबसाइट से सुराग मिले
2020 में सिख शोधकर्ताओं ने विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऐतिहासिक वस्तुओं की जानकारी खोजते समय इस दुर्लभ पांडुलिपि का पता लगाया। इसके बाद इसके संरक्षण का काम किया गया। भारत के वाणिज्य दूतावास ने बताया कि टीम ने एडिनबर्ग और ग्लासगों के गुरुद्वारा प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस पांडुलिपि को स्कॉटलैंड पहुंचाया। संस्था सिख संजोग की प्रबंध निदेशक तृष्णा सिंह ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार इसे देखा तो वह अविश्वसनीय क्षण था।

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