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बिलासपुर रेंज: गंभीर अपराधों में ‘मरणासन्न कथन’ (Dying Declaration) पर रेंज स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला संपन्न

मुंगेली। गंभीर अपराधों की विवेचना को त्रुटिहीन बनाने और न्यायालयों में सजा का प्रतिशत (Conviction Rate) बढ़ाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। पुलिस महानिरीक्षक (IG) श्री राम गोपाल गर्ग (IPS) के मार्गदर्शन में “मरणासन्न कथन (Dying Declaration): कानूनी प्रक्रिया, सावधानियां और विवेचकों के लिए दिशा-निर्देश” विषय पर एक दिवसीय रेंज स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।

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इस डिजिटल कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के सभी जिलों से लगभग 200 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री भोजराम पटेल द्वारा किया गया।

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💡 अपराधियों को सजा दिलाने में ‘मरणासन्न कथन’ सबसे अहम कड़ी: IG राम गोपाल गर्ग

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए पुलिस महानिरीक्षक श्री गर्ग ने कहा:

“अपराध विवेचना के दौरान पीड़ित का मृत्यु पूर्व कथन (Dying Declaration) और डीएनए/भौतिक साक्ष्यों का सही संकलन अपराधियों को सजा दिलाने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होता है। अक्सर कानूनी प्रक्रियाओं में होने वाली छोटी सी त्रुटि का लाभ आरोपियों को मिल जाता है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य इन्हीं कमियों को दूर करना है।”कार्यशाला के मुख्य बिंदु एवं आवश्यक दिशा-निर्देश

मुंगेली के शासकीय अधिवक्ता श्री रजनीकांत ठाकुर ने मुख्य वक्ता के रूप में ‘मरणासन्न कथन’ और साक्ष्य संकलन की बारीकियों पर विस्तृत कानूनी जानकारी साझा की:

मरणासन्न कथन की प्रमाणिकता: भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 की धारा 26 के तहत मृत्युकालिक कथन एक बेहद ठोस साक्ष्य है। मजिस्ट्रेट (कार्यपालिक दंडाधिकारी) द्वारा प्रश्नोत्तर (Question-Answer) प्रारूप में दर्ज बयान को न्यायालय में सर्वाधिक महत्व दिया जाता है।

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डॉक्टर के प्रमाणपत्र (Fitness Certificate) की अनिवार्यता: विवेचकों को सख्त निर्देश दिया गया कि बयान दर्ज करने से पहले और बाद में डॉक्टर से पीड़ित के मानसिक रूप से स्वस्थ (Fit State of Mind) होने का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। इसके अभाव में हाई कोर्ट द्वारा सजा पलटने के हालिया न्यायिक दृष्टांतों (जैसे बालोद का मामला) का उदाहरण देकर विवेचकों को सचेत किया गया।

विवेचकों (Investigating Officers) के लिए महत्वपूर्ण टिप्स:

चालान पेश करते समय ‘कॉपी-पेस्ट’ करने की प्रवृत्ति से बचें।

एफएसएल (FSL) रिपोर्ट में रक्त समूह (Blood Group) का मिलान अनिवार्य रूप से कराएं।

एससी/एसटी एक्ट के मामलों में प्रारंभिक जांच में ही जातिगत शब्दों का स्पष्ट उल्लेख करें।

गवाहों को कोर्ट में गवाही से पहले कानूनी रूप से अच्छी तरह तैयार (Briefing) करें।

📝 शंका समाधान और समापन

प्रशिक्षण के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र (Q&A Session) रखा गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों ने विवेचना और जब्ती/सैंपलिंग के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को सामने रखा। शासकीय अधिवक्ता श्री रजनीकांत ठाकुर ने इन सभी विधिक समस्याओं का समाधान किया।

सम्मान एवं धन्यवाद:

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट मार्गदर्शन के लिए शासकीय अधिवक्ता श्री रजनीकांत ठाकुर को स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) देकर सम्मानित किया गया। आईजी श्री राम गोपाल गर्ग ने सफल कार्यशाला के लिए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का औपचारिक समापन मुंगेली एसएसपी श्री भोजराम पटेल के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। इस कार्यशाला से पुलिस की जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन और विवेचना प्रणाली में बड़ा सुधार आएगा।

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प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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