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Mahadev Satta App:–ईडी का अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई, महादेव सट्टा एप प्रमोटरों की 21.45 करोड़ की संपत्ति जप्त, दुबई तक पहुंचा जाल

Mahadev Satta App:–
महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के मामले में ईडी ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। फरार चल रहे मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल तथा उनके करीबियों की कुल 21.45 करोड़ रुपए की संपत्ति जप्त की गई है। खास बात यह है कि इस मामले में पहली बार देश के बाहर दुबई में भी संपत्तियों पर कार्रवाई की गई है। जप्त संपत्तियों में चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्तियां शामिल हैं।

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Raipur रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह कार्रवाई की है। इसमें भिलाई–दुर्ग, राजस्थान की राजधानी जयपुर, दिल्ली और दुबई में स्थित संपत्तियां शामिल हैं। जप्त संपत्तियों में मकान, दुकान, प्लॉट, कृषि भूमि, लग्जरी अपार्टमेंट और महंगी गाड़ियां जैसे टोयोटा, महिंद्रा थार और फॉर्च्यूनर शामिल हैं। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल की दुबई स्थित संपत्तियों को विदेश मंत्रालय के माध्यम से अटैच किया गया।

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अटैच संपत्तियों का विवरण:
• रवि उप्पल की दुबई (एट्रिया रा) में करीब 6.75 करोड़ की विदेशी संपत्ति।
• सौरभ चंद्राकर के करीबी पैनल ऑपरेटर रजत कुमार सिंह की भिलाई और दुबई में करीब 1 करोड़ की संपत्ति।
• पैनल ऑपरेटर सौरभ आहूजा और विशाल रमानी की 30 करोड़ की दुर्ग और भिलाई की संपत्तियां।
• पैनल ऑपरेटर विनय कुमार और हनी सिंह की 7 करोड़ की संपत्ति।
• जयपुर और नई दिल्ली में आवासीय संपत्तियां।
• महिंद्रा थार, टोयोटा फॉर्च्यूनर सहित अन्य वाहन।
• लकी गोयल की राजस्थान में 2.55 करोड़ की कई दुकानें और प्लॉट।
• दुबई के पैनल ऑपरेटर राजा गुप्ता की रायपुर में अचल संपत्ति पर अटैचमेंट की तैयारी।

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कैसे होता था सट्टा सिंडिकेट ऑपरेशन:
जांच में पता चला कि प्रमोटर इन पैनलों से होने वाले कुल मुनाफे का 70-75 प्रतिशत हिस्सा रखते थे, जबकि बाकी पैनल ऑपरेटरों को कमीशन के रूप में मिलता था। रकम को हजारों ‘म्यूल’ और ‘डमी’ बैंक खातों के जरिए लेयर किया जाता था। इसके लिए अनजान लोगों के KYC डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करके खाते खोले जाते थे।

छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की गई। खुलासा हुआ कि यह एक बड़ा सट्टेबाजी सिंडिकेट था, जो फ्रेंचाइजी मॉडल के ज़रिए चलता था। जबकि मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से संचालित कर रहे थे, उनके सहयोगी स्थानीय पैनल/ब्रांच के माध्यम से ऑपरेशन मैनेज कर रहे थे।

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