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किराए का कातिल… वीडियो गेम और पैसों का लालच, यूरोप में टीनएजर्स को कौन बना रहा किलर?

नईदिल्ली, 03 अगस्त । यूरोप में अपराध की दुनिया से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला और डरावना मामला सामने आया है। यूरोपीय पुलिस एजेंसी यूरोपीय संघ के अनुसार, यूरोप के खतरनाक अपराधी गिरोह सोशल मीडिया के जरिए कम उम्र के किशोरों को पैसों का लालच देकर हत्याओं और गंभीर वारदातों के लिए भर्ती कर रहे हैं।ये आपराधिक गिरोह बच्चों को मोटी रकम का झांसा देते हैं और उन्हें वीडियो गेम की तरह इस्तेमाल करते हैं। इस नए और खतरनाक ट्रेंड को पुलिस हिंसा-एज-ए-सर्विस कह रही है।

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मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे खेल के पीछे मुख्य रूप से स्वीडन का एक कुख्यात अपराधी गिरोह फॉक्सट्रॉट नेटवर्क शामिल है। पुलिस का मानना है कि इस गैंग ने 2022 से अब तक लगभग 35 हत्याओं को अंजाम दिया है। इतना ही नहीं इस गैंग पर यूरोप में इजरायली ठिकानों पर हमले करने और ईरान सरकार के साथ मिलकर काम करने के आरोप भी हैं। बता दें कि इस गैंग का सरगना रावा माजिद है, जो स्वीडन और तुर्किए से भागकर कथित तौर पर अब ईरान की राजधानी तेहरान में रह रहा है। साल 2025 में ब्रिटेन सरकार ने इस पर और इसके गैंग पर प्रतिबंध भी लगाए थे।इस बात को ऐसे समझिए कि गैंग के शातिर अपराधी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करके युवाओं को अपने जाल में फंसाते हैं। इसके दो बड़े मामले सामने आए हैं। पहला स्वीडन से अतील अजीमोव का मामला और दूसरा नॉर्वे से जोहान्स नैटलैंड का मामला। कुछ महीने पीछे चले तो, स्वीडन के स्टॉकहोम में फरवरी में 18 साल के अतील अजीमोव ने एक 20 साल के छात्र की गोली मारकर हत्या कर दी थी। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि उसने गलती से गलत शख्स को गोली मार दी थी। पुलिस के मुताबिक, उसे इस काम के लिए पैसों का लालच दिया गया था, लेकिन गिरफ्तारी तुरंत हो जाने के कारण उसे एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस मामले को ऐसे समझिए कि नॉर्वे का रहने वाला एक अन्य किशोर जोहान्स नैटलैंड रिटेन में हत्या की साजिश रचने के मामले में पकड़ा गया।

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उसे एक मैसेज मिला जिस पर लिखा था कि इंग्लैंड में हत्या, 270द्म यानी करीब 2,70,000 नॉर्वेजियन क्रोनर, जो लगभग 21,000 पाउंड यानी भारतीय रुपयों में एक बड़ी रकम बनती है।मिली जानकारी के अनुसार नैटलैंड को जनरलन नाम के एक ऑनलाइन यूजर ने भर्ती किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि उस समय जनरलन खुद महज 16 साल का था और एक चिल्ड्रेन होम में रहता था। इसी जनरलन ने अतील अजीमोव को भी रिक्रूट किया था।नैटलैंड को रिक्रूट करने के बाद जनरलन ने उसकी बात गैंग के एक अन्य सदस्य से कराई, जो ऑनलाइन एजेंट 47 के नाम से एक्टिव था। यह नाम एक मशहूर वीडियो गेम हिटमैन के मुख्य किरदार से लिया गया था। एजेंट 47 ने ही नैटलैंड के लिए मैनचेस्टर का वन-वे फ्लाइट टिकट बुक किया और उसे इमरजेंसी पासपोर्ट बनवाने में मदद की। नैटलैंड को सिग्नल एप के जरिए निर्देश दिए जाते थे।

गैंग के दूसरे सदस्यों ने उसे नक्शे और वीडियो भेजकर बताया कि हथियार कहां छिपे हैं और पैसे झाडिय़ों में कहां रखे हैं। नैटलैंड होटल पहुंचा और अगले हमले की तैयारी कर रहा था, उससे पहले ही ब्रिटिश पुलिस ने उसे धर दबोचा।ध्यान देने वाली बात यह है कि इस तरह के मामलों को रोकने और गिरोह की कमर तोडऩे के लिए यूरोपोल ने ‘ह्रञ्जस्न त्रक्रढ्ढरूरू’ नाम से एक विशेष टास्क फोर्स बनाई है, जिसमें 11 यूरोपीय देशों की पुलिस शामिल है।गौरतलब है कि पिछले 15 महीनों में इस टास्क फोर्स ने 280 से ज्यादा संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने ‘एजेंट 47’ की पहचान अली शहाद अहमद के रूप में की है, जिसे इराक से गिरफ्तार किया गया है। स्वीडन ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की है।यूरोपोल के सीरियस एंड ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सेंटर के प्रमुख एंड्री क्राग ने इसे कमजोर युवाओं को किराए पर लेकर सुनियोजित तरीके से हत्याएं करवाना करार दिया है। भले ही पुलिस ने कई गुर्गों को दबोच लिया है, लेकिन मुख्य सरगना रावा माजिद अभी भी ईरान में सुरक्षित छिपा हुआ है और पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

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प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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