तरदा गांव में सुबह-सुबह दिखा विशाल मगरमच्छ, वन विभाग और RCRS टीम ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
कोरबा। जंगल और ग्रामीण इलाकों से सटे गांवों में वन्यजीवों की दस्तक लगातार लोगों के लिए चिंता का कारण बन रही है। शनिवार की सुबह कोरबा से करीब 16 किलोमीटर दूर तरदा गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक ग्रामीण के घर के पास करीब 4.5 फीट लंबा मगरमच्छ दिखाई दिया। मगरमच्छ को देखकर ग्रामीण कुछ देर के लिए सकते में आ गए।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 6 बजे ग्रामीण थिरत राम मांझी ने अपने घर के पास एक जीव को देखा। दूर से देखने पर उन्हें लगा कि शायद कोई अजगर है, लेकिन जब उन्होंने गौर से देखा तो सामने करीब साढ़े चार फीट लंबा मगरमच्छ मौजूद था। इसके बाद तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी गई।
सूचना मिलते ही वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, वनमंडल कोरबा की टीम सक्रिय हुई। वनमंडलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव के निर्देश एवं उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में वन विभाग की टीम के साथ RCRS रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची।
सावधानी से किया गया मगरमच्छ का रेस्क्यू
रेस्क्यू ऑपरेशन में करतला रेंजर अक्ष पलक ऋषि, परिसर रक्षक कपिल कंवर संडैल, परिसर रक्षक दीपक कुजूर महोरा, वनपाल के.पी. सिदार, सर्प मित्र जितेंद्र सारथी, RCRS अध्यक्ष अविनाश यादव सहित रेस्क्यू टीम के सदस्य मानस मौजूद रहे।
टीम ने बेहद सावधानी और सूझबूझ के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया। काफी सतर्कता के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया गया। इसके बाद आवश्यक पंचनामा कार्रवाई पूरी की गई।
कोटमीसोनार भेजा गया मगरमच्छ
रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित वाहन से मगरमच्छ संरक्षण आरक्षित क्षेत्र, कोटमीसोनार, वनमंडल जांजगीर-चांपा भेज दिया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने ग्रामीणों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा।
मगरमच्छ के आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचने से कुछ समय के लिए ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल रहा, लेकिन वन विभाग और RCRS टीम की तत्परता से किसी तरह की जनहानि या अन्य नुकसान नहीं हुआ और मगरमच्छ का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया।
वन विभाग की ग्रामीणों से अपील
वनमंडल कोरबा ने ग्रामीणों और आम नागरिकों से अपील की है कि वन्यजीव दिखाई देने पर घबराएं नहीं और उसे पकड़ने या उसके करीब जाने का प्रयास न करें। तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर सके। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए नागरिकों की संवेदनशीलता और सहयोग बेहद जरूरी है।

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