
कोरबा, 2 अगस्त। कोरबा वनमंडल के करतला वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम कनकी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा एशियन ओपन बिल स्टॉर्क (घोंघिला) एवं अन्य वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान आयोजित किया गया। वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देश तथा उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, शिव श्रद्धालु, युवा और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। वन्यजीव रेस्क्यू टीम के प्रमुख जितेंद्र सारथी ने कहा कि वन्यजीव केवल जंगलों की ही नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण और मानव जीवन की सुरक्षा के आधार हैं। उन्होंने लोगों से किसी भी वन्यजीव को नुकसान न पहुंचाने तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की।
नोवा नेचर के पार्थ चंद्राकर ने एशियन ओपन बिल स्टॉर्क की जीवनशैली, भोजन, प्रजनन और किसानों के लिए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पक्षी खेतों में पाए जाने वाले घोंघों की संख्या नियंत्रित कर प्राकृतिक खेती और जैविक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
करतला रेंज ऑफिसर अक्ष पलक ऋषि ने भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए ग्रामीणों को वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि वन विभाग संरक्षण कार्यों में हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के समापन पर ग्रामीणों को लकड़ी से निर्मित कृत्रिम घोंसलों का वितरण किया गया और उन्हें अपने घरों व आसपास सुरक्षित स्थानों पर इन्हें स्थापित कर पक्षी संरक्षण में भागीदारी निभाने का संदेश दिया गया। इस दौरान कनकी की “पक्षी मित्र युवा समिति” के सक्रिय सदस्यों को वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से ‘पक्षी मित्र’ टी-शर्ट प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में सरपंच प्रतिनिधि गोरेलाल मांझी, जनपद सदस्य सुषमा राजवाड़े, नमर्दा राजवाड़े, रामधन राजवाड़े, मोहम्मद इकबाल मेमन, दिनेश राजवाड़े, लक्षण यादव, सुरेश राजवाड़े, युवा समिति अध्यक्ष रामेश्वर दास महंत, सचिव बसंत राजवाड़े, विजय राजवाड़े, डिप्टी रेंजर केशव सिदार, वन रक्षक कपिल कंवर, चंद्रशेखर कंवर, परमेश्वर बंजारे, दीपक कुजूर, प्रतीक तिवारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
प्रमुख बिंदु:
एशियन ओपन बिल स्टॉर्क संरक्षण पर विशेष जनजागरूकता अभियान।
किसानों के लिए पक्षी की उपयोगिता की जानकारी।
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों से ग्रामीणों को अवगत कराया गया।
ग्रामीणों को कृत्रिम लकड़ी के घोंसलों का वितरण।
संरक्षण कार्यों में सक्रिय युवाओं को ‘पक्षी मित्र’ टी-शर्ट देकर सम्मानित किया गया।
संदेश:
“प्रकृति की रक्षा तभी संभव है, जब समाज का हर व्यक्ति वन्यजीव संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझे।”

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