कोरबा। जिला पुलिस कप्तान सिद्धार्थ तिवारी ने अपराधियों और अवैध कारोबारियों से सांठगांठ रखने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक बार फिर सख्त रुख अख्तियार किया है। डीजल चोरों को शह देने और संदिग्ध भूमिका पाए जाने के बाद एसपी ने कड़ा एक्शन लेते हुए चार पुलिसकर्मियों (दो प्रधान आरक्षक और दो आरक्षक) को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।
इस बड़ी कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे और अपराधियों को संरक्षण देने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया है।
कैसे फूटा ‘खाकी’ की मिलीभगत का घड़ा?
हाल ही में दीपका पुलिस ने डीजल चोर गिरोह के फरार सरगना और इनामी बदमाश नवीन कश्यप समेत उसके दो साथियों (पुरुषोत्तम और सब्बीर) को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
गिरफ्तारी के बाद एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर मामले की ‘एंड-टू-एंड’ (शुरुआत से अंत तक) कड़ाई से विवेचना की गई। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि आखिर कड़े पहरे के बावजूद इन चोरों के हौसले इतने बुलंद क्यों थे? गहन जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि विभाग के ही कुछ लोग इन अपराधियों को पुलिसिया कार्रवाई की गोपनीय सूचनाएं लीक कर रहे थे और उन्हें राहत पहुंचा रहे थे।
गाज की जद में आए ये पुलिसकर्मी
डीजल चोरी प्रकरण की जांच के दौरान घोर लापरवाही और संदिग्ध भूमिका की विभागीय पुष्टि होने के बाद निम्नलिखित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है:
कटघोरा थाना: यहां पदस्थ 01 प्रधान आरक्षक (Head Constable)
बांकीमोगरा थाना: यहां पदस्थ 01 प्रधान आरक्षक और 02 आरक्षक (Constable)
पूर्व में भी हो चुकी है कार्रवाई: यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अवैध नशा और कबाड़ के कारोबार में अपराधियों की मदद करने वाले कई पुलिसकर्मियों पर निलंबन की गाज गिर चुकी है।
कप्तान का कड़ा संदेश: “छवि खराब करने वाले सुधर जाएं, वरना…”
पुलिस अधीक्षक (SP) की यह सख्त कार्रवाई जिले के सभी पुलिसकर्मियों के लिए एक कड़ा और सीधा संदेश है। कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने, राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले चोरों का साथ देने और पुलिस की छवि धूमिल करने वालों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आमजन का भरोसा बनाए रखना पहली प्राथमिकता: अपराधियों से खाकी के तालमेल के कारण न सिर्फ पुलिस की कार्रवाई कमजोर पड़ती है, बल्कि जनता का विश्वास भी डगमगाता है। एसपी की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि जो पुलिसकर्मी वक्त रहते नहीं सुधरे और जांच के दायरे में आए, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

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