SECL कोरबा में ₹3.36 अरब का ‘रिफंड खेल’: थर्ड पार्टी सैंपलिंग और क्रेडिट नोट्स की आड़ में महाघोटाले का आरोप, CBI और ED जांच की मांग

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के कोरबा क्षेत्र से देश के राजस्व को भारी चपत लगाने और वित्तीय अनियमितता का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कुसमुंडा खदान के बाद अब कोरबा क्षेत्र में भी संगठित कॉरपोरेट भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता और पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू ने देश के शीर्ष जांच संस्थानों—माननीय मुख्य न्यायाधीश (सर्वोच्च न्यायालय), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), प्रवर्तन निदेशालय (ED), और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को लिखित शिकायत भेजकर इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।

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क्या है पूरा मामला? (उच्च ग्रेड की बिलिंग और स्लिपेज का खेल)

शिकायतकर्ता के पत्र के अनुसार, यह पूरा घोटाला ‘थर्ड पार्टी सैंपलिंग’ और ‘ग्रेड स्लिपेज’ (Grade Slippage) की आड़ में खेला जा रहा है, जो प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत एक गंभीर राष्ट्रीय अपराध है। इस खेल को निम्नलिखित चरणों में अंजाम दिया जाता है:

कागजों पर उच्च ग्रेड का कोयला: SECL कोरबा क्षेत्र की खदानों से जब रेलवे और सड़क मार्ग के जरिए कोयला डिस्पैच किया जाता है, तो दस्तावेजों में उसे G4 और G5 जैसी उच्च गुणवत्ता (High Grade) का दिखाकर भारी-भरकम बिल जनरेट किए जाते हैं।

मिलीभगत से गुणवत्ता में गिरावट: कोयला रवाना होने के बाद, ‘तृतीय पक्ष सैंपल कलेक्शन एजेंसियों’ (Third Party Sampling Agencies) के साथ कथित मिलीभगत से कोयले की गुणवत्ता को जानबूझकर गिरा हुआ (Slippage) घोषित कर दिया जाता है।

चुनिंदा निजी घरानों को फायदा: गुणवत्ता गिरने के नाम पर क्रेडिट/डेबिट नोट्स जारी किए जाते हैं। आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड (पत्र क्र. 155 दिनांक 12/08/2025) का हवाला देते हुए बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2023-24 के बीच ₹3,36,78,21,990.88 (तीन अरब छत्तीस करोड़ रुपये से अधिक) की भारी-भरकम राशि शुद्ध रिफंड के रूप में बिलासपुर मुख्यालय से प्रोसेस कर चुनिंदा निजी कंपनियों को वापस लौटा दी गई।

मुख्यालय के बड़े अधिकारियों पर उंगली; RTI दबाने का आरोप

शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि सरकारी खजाने को लूटकर काला धन (Black Money) पैदा करने के लिए यह एक सुनियोजित सिंडिकेट है।

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बिना शीर्ष अधिकारियों की मर्जी के असंभव: SECL कोरबा के वित्त प्रबंधन ने लिखित में स्वीकार किया है कि ग्रेड अंतर की रिफंड राशि सीधे बिलासपुर मुख्यालय से जारी होती है। आरोप है कि बिलासपुर मुख्यालय के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (CMD) और तकनीकी निदेशक की प्रत्यक्ष अनुमति, वित्तीय स्वीकृति और हस्ताक्षरों के बिना इतने बड़े पैमाने पर ₹3.36 अरब का रिफंड जारी होना नामुमकिन है।

इसके अलावा, इस महाघोटाले को छुपाने के लिए आरटीआई (RTI) के तहत मांगी गई वित्तीय जानकारियों को जानबूझकर दबाने और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया है।

शिकायत पत्र के मुख्य अंश: जांच एजेंसियों से की गई मांगें

दिनांक 19/05/2026 को प्रेषित अपने शिकायत पत्र में जितेंद्र कुमार साहू ने निम्नलिखित कड़ी कार्रवाइयों की मांग की है:

तत्काल FIR और जांच: ₹3.36 अरब से अधिक के इस अवैध वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ: SECL बिलासपुर मुख्यालय के तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD), तकनीकी निदेशक व कोरबा क्षेत्र के तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों को जांच के दायरे में लाकर कड़ी पूछताछ हो।

फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit): बिलासपुर मुख्यालय द्वारा पिछले 7 वर्षों में जारी किए गए सभी क्रेडिट नोट्स, रिफंड फाइलों और थर्ड पार्टी सैंपलिंग रिपोर्ट्स का विशेष फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।

न्यायालय का स्वतः संज्ञान: माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय बिलासपुर देश के राजस्व की इस खुली डकैती पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए अपनी निगरानी में समयबद्ध केंद्रीय जांच सुनिश्चित कराएं।

हड़कंप: कुसमुंडा के बाद अब कोरबा क्षेत्र की खदान से जुड़े इस नए खुलासे के बाद कोयलांचल सहित प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि देश की शीर्ष जांच एजेंसियां इस गंभीर शिकायत पर क्या रुख अपनाती हैं।

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