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60 लाख की आमदनी… फिर भी बकरी बाजार बना ‘गंदगी का अड्डा’! पंचायत की लापरवाही से सड़ा पड़ा है मरवाही का एकमात्र साप्ताहिक बाजार

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मरवाही- बाजार में बनी टीन की छतें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। बरसात में ये शेड पानी टपकाते हैं, जिससे व्यापारियों को बकरियों को बचाने तक में दिक्कत होती है।

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गौरेला पेंड्रा मरवाही |
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का एकमात्र साप्ताहिक बकरी बाजार इन दिनों अव्यवस्थाओं और गंदगी की वजह से बदनाम होता जा रहा है। लाखों रुपये की आमदनी देने वाला यह बाजार आज खुद बदहाल हालत में दम तोड़ रहा है। दूर-दराज से आने वाले व्यापारी और ग्रामीण जहां बकरी खरीदने-बेचने आते हैं, उन्हें अब इस गंदगी, बदइंतजामी और टूटे ढांचे के बीच अपनी मर्जी मारकर व्यापार करना पड़ रहा है।

60 लाख की सालाना कमाई, पर व्यवस्था राम भरोसे!

पेंड्रा जनपद पंचायत के ग्राम कुड़कई दुबटिया में चलने वाले इस बाजार से ग्राम पंचायत को सालाना लगभग 60 लाख रुपये की आमदनी होती है। यह रकम बकरी बाजार के ठेके से प्राप्त होती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी रकम आने के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाएं तक नदारद हैं।

चारों तरफ फैली गंदगी, जर्जर शेड, बंद शौचालय, और न बिजली न पानी – यही बाजार की पहचान बन चुकी है।

सफाई के नाम पर सिर्फ दिखावा

बाजार की हालत यह है कि चारों तरफ कचरे और मवेशियों की गंदगी का ढेर लगा रहता है। सफाईकर्मी नदारद हैं और न ही पंचायत द्वारा कोई नियमित व्यवस्था की गई है।
शौचालयों की स्थिति तो और भी शर्मनाक है – कई जगहों पर शौचालयों में ताले लटक रहे हैं, कुछ पूरी तरह टूट चुके हैं, और कई में घुसना भी नामुमकिन है।

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपए की लागत से बने ये शौचालय आज गंदगी और बदबू का केंद्र बन चुके हैं।

बारिश में टपकती छतें, व्यापारियों की परेशानी दोगुनी

बाजार में बनी टीन की छतें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। बरसात में ये शेड पानी टपकाते हैं, जिससे व्यापारियों को बकरियों को बचाने तक में दिक्कत होती है। कीचड़ और फिसलन से कई बार जानवर घायल हो जाते हैं और व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।

पंचायत जिम्मेदार, लेकिन चुप!

स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव को कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें दीं, लेकिन ना कोई सुनवाई हुई और ना ही सुधार के कोई प्रयास। पंचायत की उदासीनता और गैरजवाबदेही का खामियाजा अब जनता और व्यापारी दोनों भुगत रहे हैं।

यह सिर्फ बाजार नहीं, हजारों परिवारों की आजीविका का जरिया है

यह बाजार सिर्फ व्यापारियों के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोज़गार का जरिया भी है। लेकिन पंचायत की घोर लापरवाही ने इस संभावनाशील व्यापार केंद्र को एक बदनाम और उपेक्षित जगह बना दिया है।

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