
ठेका कर्मी कल्याण संघ ने वितरण कंपनी के डीई को लिखा पत्र
कोरबा 03 फरवरी। छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी के अंतर्गत काम कर रहे ठेका कर्मियों के सामने ईपीएफ से जुड़ी समस्याएं अब तक हल नहीं हो सकी है। बार-बार यह मसला सामने आ रहा है। उन्होंने सीएसपीडीसीएल के डिविजन इंजीनियर से जानना चाहा है कि ईपीएफ की राशि है कहां और इसे जमा कराने का जिम्मा है किसका?
ठेका कर्मी कल्याण संघ ने इस बारे में वितरण कंपनी के कटघोरा और कोरबा ईस्ट के डीई को पत्र दिया है। इसमें कहा गया है कि जनवरी 2024 और फरवरी 2024 में जेवीएस इंटरप्राइजेस के द्वारा वेतन भुगतान किया गया था। ईपीएफ की राशि भी जमा नहीं की गई। मार्च 2024 से दिसंबर 2024 तक 10 महीने का विभाग द्वारा ईपीएफ व ईएसआईसी की राशि काटकर जिले में सभी 33/11 केवी उपकेंद्र के ऑपरेटर्स को वेतन का भुगतान किया गया। इसी तरह कोरबा शहर संभाग में जनवरी से अक्टूबर, कोरबा ग्रामीण डिविजन में जनवरी से नवंबर और कटघोरा डिविजन में जनवरी से दिसंबर तक का ईपीएफ की राशि जमा कराने के लिए पत्र से अवगत कराया गया। अफसोस इस बात का है कि दो वर्ष पार होने पर भी इस दिशा में कार्यवाही नहीं की गई और न ही किसी भी कर्मचारी का मेंबर आईडी जनरेट किया गया। यही नहीं ठेका कर्मियों की ईपीएफ की राशि जमा कराने हेतु रूचि नहीं ली गई। यह बात अलग है कि विभाग द्वारा मांगे कर्मचारियों के बैंक खाते, आधार और पैनकार्ड की कापी समय पर जमा कर दी गई है। ईपीएफ जमा न होने से कई तरह के पचड़े खड़े हो रहे हैं और इससे कर्मी चिंतित है। छत्तीसगढ़ विद्युत विभाग ठेका कर्मचारी संघ के ललित किशोर बरेठ ने कार्यपालन अभियंताओं को भेजे गए पत्र में कहा है कि 10 दिन के भीतर ईपीएफ की राशि कर्मियों के यूएएन पर जमा कराई जाए। ऐसा न होने पर जिले के सभी विद्युत उपकेंद्र के ऑपरेटर सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे। ऐसी स्थिति में अव्यवस्था उत्पन्न होती है तो इसकी सभी जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी।
अकेले कोरबा में ही ईपीएफ की राशि 5 से 10 लख रुपए बाकी है। यहां पर 297 कर्मचारी बिजली सर्विस स्टेशन में काम करते हैं ।कोरबा के अलावा जेबीएस कंपनी का ठेका शक्ति और जांजगीर चांपा जिले में भी है। वहां भी इस प्रकार की समस्याएं हैं। इस मसले का समाधान जरूरी है। बिजली सब स्टेशन में तकनीकी और संधारण कार्य से जुड़े ठेका कर्मियों के मामले में कभी वेतन तो कभी ईपीएफ की राशि को लेकर परेशानियां खड़ी हो रही है। पावर कंपनी इस प्रकार के कार्यों के लिए आउट सोर्सिंग पर अनुबंध कर रही है। टेंडर के समय शर्तें साफ होती है लेकिन कामकाज शुरू होने के बाद कंपनी के नखरों से कर्मचारी परेशान हो जाते हैं। त्योहारी सीजन में ठेका कर्मियों को कामकाज बंद कर अधिकारियों को लाइन पर लाना पड़ा तब वेतन और बोनस के मसले हल हुए। अब जबकि एक बार फिर कर्मियों ने कामकाज ठप करने का ऐलान किया है तब प्रबंधन का रूख क्या होता है, इसका इंतजार रहेगा।

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