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कही-सुनी @ रवि भोई

कही-सुनी (05 JULY-26) : रवि भोई

बृजमोहन और ओपी चौधरी की लड़ाई में उलझा नकटी मामला ?


शहर और स्थानीय मार्गदर्शिका
विधायक कालोनी के लिए नकटी गांव के लोगों को विस्थापित करने का मामला राजनीतिक रंग में सराबोर हो गया है। कांग्रेस के विधायकों ने नकटी गांव में बनने वाली विधायक कालोनी में प्लाट-मकान नहीं लेने का ऐलान कर दिया है। कुछ कांग्रेसी विधायकों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर अपनी मंशा जाहिर कर दी है और वहां विधायक कालोनी नहीं बनाने का आग्रह किया है। भाजपा के विधायक चुप्पी साधे हुए हैं। इस इलाके के विधायक अनुज शर्मा ने पहले तो मुंह खोला। अब उन्होंने भी जुबान बंद कर लिया है। पर रायपुर के सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल खुलकर शासन-प्रशासन के फैसले का विरोध कर रहे हैं। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने तो बसाहट उजाड़ने वाले अफसरों पर कार्रवाई की बात की है। सरकार का दावा है कि कई लोग नकटी में हजारों वर्ग फीट सरकारी जमीन पर बेजा कब्जा कर बैठे थे। कुछ ही लोग पीड़ित हैं, जिनका पुनर्वास कर दिया गया है। सरकार कुछ भी कहे ,नकटी वाले सड़क पर हैं और कांग्रेस को बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है। नकटी वाले विस्थापित करने के मुद्दे पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले थे। सांसद ने उन्हें नहीं हटाए जाने का आश्वासन दिया था। लेकिन इस आश्वासन के दो दिन बाद ही सरकारी मशीनरी गई और बुलडोजर एक्शन कर दिया, वह भी सरकारी छुट्टी के दिन। लोग कह रहे हैं नकटी वालों ने गलत दरवाजा खटखटा दिया। वे बृजमोहन अग्रवाल की जगह मंत्री ओपी चौधरी के दरवाजे जाते, तो उनकी छत नहीं उजड़ती। ओपी चौधरी राज्य के आवास और पर्यावरण मंत्री हैं और उनके विभाग से जुड़ा मसला है। कहा जाता है राज्य की राजनीति में बृजमोहन अग्रवाल और ओपी चौधरी में छत्तीस का आंकड़ा है। डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में जब बृजमोहन अग्रवाल कैबिनेट मंत्री थे, तब ओपी चौधरी रायपुर के कलेक्टर थे। समय बदला और पहली बार विधायक बनते ही ओपी चौधरी कैबिनेट मंत्री बन गए और पावरफुल भी। बृजमोहन अग्रवाल मंत्री से सांसद रह गए। कहा जा रहा है दो विपरीत ध्रुवों की टकराहट से नकटी का मुद्दा राज्य की राजनीति को हिला रहा है। विधायक कालोनी के लिए नकटी ही क्यों, यह भी सवाल उठ रहा है। छत्तीसगढ़ की विधानसभा नवा रायपुर में बन गया है और सत्र भी आहूत होने लगा है। ऐसे में विधायक कालोनी के लिए नवा रायपुर में जगह क्यों नहीं तलाशी गई ? छत्तीसगढ़ में विधायकों को पहले भी सस्ते दर पर जमीन मिल चुकी है। नकटी में भी विधायकों को न्यूनतम दर पर प्लाट मिलेगा। पूरे मामले में प्रशासनिक चूक भी दिखाई पड़ रही है। नकटी की जमीन सरकारी है तो कब्जा क्यों होने दिया और विधायकों की कालोनी के आबंटन से पहले कब्जा मुक्त क्यों नहीं किया गया। कुल मिलाकर नकटी का मुद्दा चक्रव्यूह जैसा हो गया है। 

मंत्री-अफसर का धन जमीन के धंधे में
दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को देश के मेट्रो शहरों के रूप में जाना जाता है, पर आजकल राजधानी रायपुर में एक मेट्रो की बड़ी चर्चा है। कहते हैं मेट्रो प्रोजेक्ट के माध्यम से राज्य के एक मंत्री और एक अफसर का धन बह रहा है। मंत्री जी पहली बार विधायक बने हैं। इसके पहले तक राज्य में उनका नामलेवा न था। मंत्री बनते ही शायद धन बरसने लगा और निवेश के लिए विकल्प की तलाश करनी पड़ी। अधिकारी महोदय भूपेश बघेल के राज में बड़े ही पावरफुल थे। कांग्रेस राज जैसा भले मलाई नहीं मिल रही है, फिर भी इस सरकार में ठीक-ठाक पोजीशन है। चर्चा है कि वरिष्ठ अधिकारी साहब महासमुंद जिले में भी जमीन में काफी निवेश कर रखा है।

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आईएएस की पीड़ा
कहते हैं एक आईएएस अफसर कलेक्टर नहीं बन पाने से बड़े दुखी हैं। इस आईएएस अफसर के बैच वाले तो कलेक्टर हैं ही, उनसे कुछ सीनियर और जूनियर भी जिला संभाल रहे हैं। वैसे इस आईएएस को एक बार कलेक्टरी का मौका मिला था, पर काफी कम दिनों के लिए। अब कलेक्टर बनने के लिए उनके पास मौका कम है, इस कारण बड़े पद में पहुंचने से पहले एक बार और जिले का आनंद ले लेना चाहते हैं। हालांकि इस अधिकारी के पास अभी दो चार्ज है, पर कलेक्टर तो कलेक्टर होता है। उम्मीद थी कुछ कलेक्टर बदलेंगे, तो उन्हें मौका मिल जाएगा,पर कलेक्टरों की लिस्ट तो बीरबल की खिचड़ी की तरह हो गई है।

पावरफुल कलेक्टर साहब
कहते हैं कि राज्य में एक जिले के कलेक्टर इतने पावरफुल हैं कि सरकार उन्हें बदलने की मंशा रखते हुए भी फैसला नहीं कर पा रही है। चर्चा है कि एक कलेक्टर के कारण आधे दर्जन कलेक्टरों का हेरफेर रुक गया है। बताते हैं कि सरकार तय नहीं कर पा रही है कि इस कलेक्टर को किसी दूसरे जिले में भेजा जाय या फिर किसी विभाग के विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाय। सुनने में आता है कि कलेक्टर साहब एक मंत्री जी के काफी करीबी हैं। इस कारण सांसद और विधायक की नाराजगी के बाद भी जिस जिले में हैं, वहां अंगद के पांव की तरह जमे हैं। सांसद और विधायक जी का पावर काम नहीं आ रहा है। यह कलेक्टर साहब थोड़े -थोड़े समय के लिए भूपेश बघेल की सरकार में भी दो-तीन जिलों में कलेक्टर रहे।

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शाह के दरबार में तलब हुए मंत्री जी
कहते हैं राज्य के एक कद्दावर मंत्री पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दरबार में तलब हुए। चर्चा है की अमित शाह ने मंत्री जी को ज्ञान की घुटी पिलाई। कहा जाता है कि मंत्री जी को शुक्रवार को अमित शाह के आफिस से फोन आया। इसके बाद मंत्री ने अपना बस्तर दौरा रद्द कर दिल्ली रवाना हो गए। सुनने आ रहा है कि अमित शाह से मंत्री जी शुक्रवार की रात को ही मुलाक़ात हो गई और मंत्री जी शनिवार को आईआईएम में आयोजित चिंतन शिविर में शामिल हो गए। मंत्री जी का अपना प्रभाव है और क्षेत्र में पकड़ भी। अब अमित शाह ने मंत्री जी का ज्ञान चक्षु खोले, यह तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा।

मोदी आएंगे बस्तर
कहते हैं बस्तर में नक्सलवाद के सफाए के बाद नए बस्तर की नींव रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर-नवंबर में बस्तर आ सकते हैं। प्रधानमंत्री कई परियोजनाओं का शिलान्यास कर सकते हैं। नक्सलवाद के खात्मे के बाद राज्य की विष्णुदेव साय सरकार का लक्ष्य बस्तर को नया आकार देना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री से दिल्ली में मुलाक़ात कर बस्तर के विकास की नई रुपरेखा उनके सामने रखी है। कहा जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहकारिता के माध्यम से बस्तर के आदिवासियों के विकास की धारा को तेज करना चाहते हैं। चर्चा है कि इसके लिए बस्तर के आदिवासियों को गाय या भैंस दिया जाएगा और साथ में बस्तर में अमूल का प्लांट भी लगाया जाएगा, जिससे गुजरात के आणंद की तरह बस्तर का विकास हो सके और आदिवासी आत्मनिर्भर बन सके।

एच ओ डी की भूमिका में सचिव
चर्चा है कि लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल इन दिनों विभागाध्यक्ष (HOD) की भूमिका में नजर आ रहे हैं। कहते हैं कि वे जिले-जिले जाकर अफसरों की मीटिंग ले रहे हैं और जरुरी निर्देश दे रहे हैं। लोक निर्माण विभाग में अब तक प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी चर्चा में रहते थे, लेकिन जब से मुकेश बंसल ने पीडब्ल्यूडी के सचिव की कमान संभाली है, श्री भतपहरी परदे के पीछे नजर आ रहे हैं। विजय भतपहरी को भूपेश बघेल की सरकार ने ईएनसी के पद से हटा दिया था, लेकिन विष्णुदेव साय की सरकार ने फिर कुर्सी पर बैठा दिया। लोक निर्माण विभाग सरकार के काम को प्रतिबिंबित करता है। अच्छी सड़क हो तो लोग सरकार की तारीफ करते हैं, पर जब सड़कों पर गड्डे होते हैं तो कोसते हैं। अब बारिश आ गई है, सड़कों का असली नजारा नजर आएगा।

फिर चूके कुजूर
महानदी परियोजना के मुख्य अभियंता मक्सी कुजूर जल संसाधन विभाग के प्रभारी प्रमुख अभियंता बनने से फिर चूक गए। कहते हैं एक पुराना मामला उनके लिए लगातार रोड़ा बन रहा है। कहा जा रहा है जब शंकर ठाकुर को प्रभारी ईएनसी बनाया गया था, तब भी मक्सी कुजूर का नाम चला था, उस समय भी वे पीछे रह गए। शंकर ठाकुर के रिटायरमेंट के बाद फिर उनका नाम चला। इस बार हसदेव कछार, जल संसाधन विभाग बिलासपुर के मुख्य अभियंता जितेंद्र कुमार नेताम बाजी मार ले गए। सरकार ने जल संसाधन का प्रभारी ईएनसी जितेंद्र कुमार नेताम को बना दिया और मक्सी कुजूर फिर पीछे रह गए। चर्चा है कि मक्सी कुजूर जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश टोप्पो की पसंद थे, पर समीकरण नहीं बैठ पाया। मक्सी कुजूर मंत्रालय में जल संसाधन विभाग के ओएसडी भी रहे हैं। जल संसाधन विभाग में सेलेबस्तर मिंज को मुख्य अभियंता मिनी माता (हसदेव) बांगो परियोजना बिलासपुर और सुमन कुमार मिंज को मुख्य अभियंता महानदी परियोजना रायपुर बनाया जाना चर्चा का विषय है। 

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