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तारा कोल ब्लॉक पर अभी खनन नहीं : नीलामी हुई, अब वन-पर्यावरण मंजूरी समेत कई चरण बाकी

रायपुर, 12 सितंबर 2026 : तारा कोल ब्लॉक को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने स्थिति स्पष्ट की है। निगम के अनुसार फिलहाल तारा कोल ब्लॉक की केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है। वास्तविक खनन शुरू होने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरण स्वीकृति, वन स्वीकृति समेत सभी जरूरी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

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निगम ने साफ किया है कि नीलामी में सफल बोलीदाता को केवल नीलामी जीतने से खनन की अनुमति नहीं मिल जाती। निर्धारित प्रक्रियाओं और सक्षम स्तर से सभी अनुमोदन मिलने के बाद ही वास्तविक खनन गतिविधियां शुरू हो सकेंगी।

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9 कंपनियों ने लगाई थी बोली

तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में कुल 9 बोलियां प्राप्त हुई थीं। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक CG Syn&Gas and Chemicals Limited को प्राप्त हुआ है। हालांकि, सफल बोलीदाता को आगे माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति सहित अन्य अनिवार्य अनुमतियां हासिल करनी होंगी।

निगम ने स्पष्ट किया :
कोल ब्लॉक की नीलामी, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति और वास्तविक खनन की अनुमति तीन अलग-अलग चरण हैं। जरूरी स्वीकृतियां मिलने से पहले वृक्षों की कटाई या वास्तविक खनन गतिविधि शुरू नहीं की जा सकती।

तारा ब्लॉक का पुराना आवंटन भी रहा चर्चा में

हसदेव-अरण्य में कोल ब्लॉकों के आवंटन और खनन से जुड़ी प्रक्रिया पहले से चली आ रही है। तारा कोल ब्लॉक वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप अन्य कोल ब्लॉकों के साथ इसका पूर्व आवंटन भी निरस्त हो गया।

इसी अवधि में हसदेव-अरण्य क्षेत्र के अन्य कोल ब्लॉक विभिन्न सरकारी विद्युत उत्पादन संस्थाओं की जरूरतों से जुड़े रहे हैं। इनमें परसा ईस्ट केते बासन (पीईकेबी) राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की विद्युत उत्पादन जरूरतों से जुड़ा प्रमुख ब्लॉक रहा है।

वन और पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया भी अलग

हसदेव-अरण्य क्षेत्र के कोल ब्लॉकों से संबंधित वन और पर्यावरण स्वीकृतियों की प्रक्रिया भी केंद्र की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में आगे बढ़ी थी। दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2011 में वन सलाहकार समिति की प्रतिकूल अनुशंसा के बावजूद केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के स्तर पर तारा और पीईकेबी के संबंध में वन स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया था।

पीईकेबी को जुलाई 2011 में स्टेज-1 और मार्च 2012 में स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लियरेंस मिली थी। इसी अवधि में परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।

पुरानी व्यवस्था से अलग है मौजूदा नीलामी प्रणाली

पूर्व की व्यवस्था में कोल ब्लॉक सरकारी कंपनियों या निर्धारित उपयोगकर्ता संस्थाओं को आवंटित किए जाते थे। वर्तमान व्यवस्था में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाती है। तारा कोल ब्लॉक की मौजूदा प्रक्रिया इसी व्यवस्था के तहत हुई है।

निगम के मुताबिक नीलामी में सफल होने से कंपनी को स्वतः खनन, वन या पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त नहीं होती। वास्तविक खनन के लिए सभी जरूरी वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करना अनिवार्य होगा।

ऊर्जा जरूरतों के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर

देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और विद्युत आपूर्ति की निरंतरता के लिए घरेलू कोयला संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण बताई गई है। दस्तावेज में कहा गया है कि हसदेव क्षेत्र में पूर्ववर्ती राज्य सरकार के कार्यकाल में भी कोयला उत्पादन और बिजली आपूर्ति की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्तरों पर निर्णय लिए गए और केंद्र सरकार से पत्राचार किया गया।

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वर्ष 2019 और 2021 में कोल ब्लॉकों के आवंटन को लेकर केंद्र सरकार से पत्राचार किया गया था। वहीं वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हसदेव क्षेत्र के कोल ब्लॉकों के संबंध में एक अशासकीय संकल्प भी पारित किया था।

मोरगा कोल ब्लॉक का मामला भी बरकरार

हसदेव-अरण्य में कोयला संसाधनों के उपयोग का विषय केवल तारा ब्लॉक तक सीमित नहीं है। मोरगा कोल ब्लॉक के आवंटन का विषय भी अभी जारी है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने इसे छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पक्ष में आवंटित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया था।

राज्य सरकार के पत्र में मोरगा से लगे मदनपुर कोल ब्लॉक के मदनपुर साउथ ब्लॉक का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि इसे केंद्रीय कोयला मंत्रालय पहले ही आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को आवंटित कर चुका है। इसी आधार पर मोरगा कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित करने का अनुरोध किया गया था।

वैज्ञानिक अध्ययन में पर्यावरणीय पहलुओं का आकलन

हसदेव-अरण्य क्षेत्र में भविष्य की खनन गतिविधियों को लेकर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद ने विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया। इसमें जैव विविधता, वन्यजीव, जलग्रहण क्षेत्र और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का आकलन किया गया।

अध्ययन में तारा सहित कुछ अन्य कोल ब्लॉक को कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और संरक्षण प्रावधानों के अधीन खनन के लिए विचार योग्य माना गया।

वन क्षेत्र में वृद्धि के आंकड़े भी सामने रखे

वन संरक्षण और वृक्षारोपण को राज्य की प्राथमिकता बताते हुए दस्तावेज में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट-2023 के आंकड़ों का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्राच्छादन में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध वृद्धि हुई, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक थी। इसी अवधि में राज्य के वनावरण में 702.75 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2021 में भी वर्ष 2019 की तुलना में छत्तीसगढ़ के वनावरण में करीब 106 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई थी।

खनन से पहले पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय जरूरी

दस्तावेज के अनुसार किसी भी खनन परियोजना में पर्यावरण और वन स्वीकृति, वैज्ञानिक अध्ययन, प्रतिपूरक वनीकरण तथा अन्य निर्धारित पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने दोहराया है कि तारा कोल ब्लॉक में अभी केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है और खनन शुरू नहीं हुआ है। सफल बोलीदाता को सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही वास्तविक खनन गतिविधियां शुरू की जा सकेंगी।

निगम के अनुसार आगे की पूरी प्रक्रिया में देश की ऊर्जा सुरक्षा, राज्य की विकास जरूरतों, वन एवं पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय हितों के बीच संतुलन को प्राथमिकता दी जाएगी।

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