कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार में अहम स्थान रखने वाले जिले कोरबा में ही विकास कार्यों से जुड़ी पार्षद निधि की शेष राशि जारी नहीं होने से ठेकेदारों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बीते दो वर्षों से लगातार पत्राचार के बावजूद नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा 50 प्रतिशत लंबित राशि जारी नहीं की गई है, जिससे निर्माण कार्य पूरा करने वाले ठेकेदार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
स्थिति यह है कि नगर निगम कोरबा के आयुक्त द्वारा कई बार विभाग को पत्र लिखे जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे ठेकेदारों के सामने भुगतान का संकट खड़ा हो गया है और उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। खास बात यह है कि कोरबा जिला प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के प्रभार में आता है, बावजूद इसके भुगतान में देरी सवाल खड़े कर रही है।
नगर निगम कोरबा के ठेकेदारों ने एक बार फिर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है। पत्र में बताया गया है कि उन्होंने पार्षद मद, अधोसंरचना, डीएमएफ, विधायक निधि, सांसद निधि और प्रभारी मंत्री मद जैसे विभिन्न मदों के अंतर्गत निर्माण कार्य पूरे किए हैं, लेकिन महीनों से लेकर सालभर तक भुगतान लंबित रखा जा रहा है।
ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान में देरी के कारण उन्हें कई तरह की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मजदूरों को भुगतान करने, पारिवारिक खर्च चलाने और व्यापारिक दायित्व निभाने में दिक्कतें आ रही हैं। यहां तक कि बाजार में उधारी पर सामान मिलना भी मुश्किल हो गया है, जिससे नए कार्यों को शुरू करना भी चुनौती बन गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि ठेकेदारों की पूंजी का चक्र (रोलिंग) ही नहीं होगा, तो वे आगे काम करने में असमर्थ हो जाएंगे। ऐसे में विभाग को इस गंभीर स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
ठेकेदारों ने मांग की है कि सभी लंबित भुगतानों को जल्द से जल्द जारी किया जाए। साथ ही उन्होंने निगम आयुक्त से व्यक्तिगत मुलाकात कर इस विषय पर विस्तृत चर्चा करने की इच्छा भी जताई है, जैसा कि पूर्व में भी बैठक आयोजित की जा चुकी है।

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