CG:– जब वर्दी में बैठे एक अफसर ने दर्द को शब्द दिए… युवा दिवस पर IPS विजय कुमार पाण्डेय की कविता ने बस्तर की आत्मा को छुआ

CG:– राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी) के मौके पर जांजगीरचांपा के एसपी विजय कुमार पाण्डेय, IPS नेबदलते बस्तरशीर्षक से अपनी लिखी कविता साझा की, जो हिंसा से शांति की ओर बढ़ते बस्तर की सच्ची तस्वीर बयान करती है।

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Janjgir-Champa | जांजगीरचांपा।
सोमवार, 12 जनवरी को देश राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने जा रहा है। ऐसे समय में जांजगीरचांपा जिले के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय, IPS ने कोई भाषण नहीं दिया, कोई मंच नहीं चुना। उन्होंने बस अपने दिल की बात लिख दीकविता के रूप में।

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उनकी स्वयं लिखी हुई कविता ‘बदलते बस्तर’ सोशल मीडिया पर सामने आई और देखते ही देखते लोगों के दिलों तक पहुंच गई। वजह साफ है—यह कविता किसी कल्पना की नहीं, बल्कि उस सच्चाई की आवाज़ है, जिसे बस्तर ने जिया है और जिसे एक पुलिस अफसर ने बहुत करीब से देखा है।

कविता की शुरुआती पंक्तियां बस्तर के उस दौर की याद दिलाती हैं, जब डर रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा था—कटे हुए गले, बिखरी लाशें, बारूद की गंध, टूटे पुल और खून से सनी सड़कें। यह दर्द किताबों में नहीं, ज़मीन पर लिखा गया था।

लेकिन यहीं से कविता उम्मीद की ओर मुड़ती है।
वही बस्तर अब बदलता दिखता हैस्कूलों से आती पहाड़ों की आवाज़ें, महुए की खुशबू, झरनों की कलकल, रोशन गांव और मुस्कराते चेहरे। डर की जगह भरोसा है और सन्नाटे की जगह भविष्य की आहट।

पढ़िए पूरी कविता | ‘बदलते बस्तर’ (लेखक: विजय कुमार पाण्डेय, IPS)

कटे हुए गले
चिथड़े हुए शरीर
बिखरी हुई लाशें
अब नहीं होंगी…

गोलियों से छलनी सीना
बारूद से उड़े पैर
स्पाइक से बिंधे तलुए
अब नहीं होंगे…

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खून से सनी सड़के
वायर बिछी हुई राहें
टूटे हुए पुल
अब नहीं होंगे…

हवा मे बारूद की गंध
पेड़ों पर धोखे का सामन
पानी मे जहर
अब नहीं होंगे…

बूढ़ी मां के सूखे आंसू
पत्नी का चित्कार
बाप का गुमसुम चेहरा
अब नहीं होंगे…

बच्चों के फुले हुए पेट
कांवर मे आते हुए बीमार
इलाज की लाचारी
अब नहीं होंगे…

100 जगह कटी हुई सड़क
टूटे हुए स्कूल
ध्वस्त बिजली के खम्भे
अब नहीं होंगे…

साल के पत्तों की सरसराहट
हवा मे महुए की खुश्बू
झरने के गिरने का दृश्य
अब होंगे…

स्कूलो से आती पहाड़े की आवाज़े
राहों मे चलते पहिये
रोशन होते गांव
अब होंगे…

निर्भय घूमते लोग
पुस्तक पकड़े बच्चे
मुस्कराती माताएं
अब होंगे…

अनुभव से उपजे शब्द

एसपी विजय कुमार पाण्डेय लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेवा दे चुके हैं —
SDOP किरंदुल, ASP बस्तर, SP STF जैसे अहम दायित्वों के दौरान उन्होंने हिंसा और बदलाव, दोनों को करीब से देखा है। यही कारण है कि उनकी कविता कल्पना नहीं, जमीनी सच्चाई से निकली आवाज़ लगती है।

युवा दिवस के मौके पर यह कविता युवाओं से चुपचाप बात करती है। यह कहती है कि बदलाव बंदूक से नहीं, भरोसे से आता है। हिंसा से नहीं, शिक्षा और संवेदनशीलता से आता है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इस तरह इंसानी दर्द और उम्मीद को शब्द देना यह भरोसा जगाता है कि सिस्टम में सिर्फ आदेश देने वाले नहीं, महसूस करने वाले लोग भी हैं।

यह कविता सिर्फ साहित्य नहीं है।
यह उस बस्तर की आवाज़ है—जो बहुत कुछ सहने के बाद अब शांति, रोशनी और भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

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