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CG:– ASP–DSP Posting छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेंज के दीवानें हैं पुलिस अफसर तबादला होने पर बदलता है केवल जिला,मलाईदार रेंज को छोड़ना नहीं चाहते ASP–DSP

CG:– बिलासपुरजीरो टॉलरेंस की बात सिर्फ भ्रष्ट्राचार के लिए लागू नहीं होता। इसका पालन हर विभाग हर पद पर होना चाहिए। एक बार अधिकारी यदि क्रिमी जिले में काम कर लेते है तो वहां का मोह अधिकारी कर्मचारी नहीं छोड़ पाते। ऐसे अधिकारी यह मान बैठे है कि जमाजुमाया काम और अपने चीरपरिचितों को भूनानें सब लौट ही आते है। पुलिस विभाग के 10-12 अफसर ऐसे है जो चकरघीन्नी में फंदे है ।कुछ सरकारी अधिकारी ऐसे है जिनको हर बार मनचाहा पोस्टिंग मिल ही जाती है।

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जीरो टॉलरेंस की नीति सिर्फ भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्थानांतरण और पदस्थापना में भी इसका समान रूप से पालन जरूरी है, लेकिन बिलासपुर पुलिस रेंज की स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। एक बार जो अधिकारी अविभाजित बिलासपुर जिले में पदस्थ हो जाता है, वह यहां से बाहर जाने को तैयार नहीं दिखता।

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Bilaspur बिलासपुर। पुलिस विभाग के भीतर खुलकर कहा जा रहा है कि कुछ अधिकारी अपने रसूख, संपर्क और जुगाड़ तंत्र के दम पर तबादले को भी मज़ाक बना चुके हैं। सूची चाहे कितनी भी सख्त हो, ये अफसर किसी किसी रास्ते से फिर बिलासपुर पुलिस रेंज में लौट आते हैं। जानकारी के अनुसार ऐसे पांच से छह ASP–DSP रैंक के अधिकारी हैं, जो वर्षों से इसी रेंज में कुर्सी घुमाते रहे हैं।

जानिए बिलासपुर रेंज में पिछले कई सालों से जमे पुलिस अफसर

1 राजेंद्र जायसवाल्, एडिशनल एसपी

2 उमेंश कश्यप, एडिशनल एसपी

3 उडयन बेहार, एडिशनल एसपी
4 दीप माला कश्यप, एडिशनल एसपी
5 अर्चना झा, एडिशनल एसपी
6 मधुलिका सिंह, एडिशनल एसपी
7 रश्मित कौर चावला, डीएसपी, अब एडिशनल एसपी

8 स्नेहिल साहू डीएसपी सारंगढ़

इनेक अलावा और भी अधिकारी है जो इस मलाईदार रेंज को छोड़ना नहीं चाहते

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स्थिति यह है कि कई अधिकारी और कर्मचारी पारिवारिक मजबूरियों के बावजूद दूरस्थ जिलों में सेवा देने को मजबूर हैं। कहीं पतिपत्नी अलगअलग जिलों में पदस्थ हैं, तो कहीं बीमार मातापिता की देखभाल प्रभावित हो रही है। कई दिव्यांग अधिकारीकर्मचारी भी ऐसे हैं, जिन्हें उनकी जरूरतों के अनुरूप स्थान पर पदस्थापना नहीं मिल पा रही है। इसके उलट कुछ अधिकारियों को हर बार मनचाही पोस्टिंग मिल जाती है।

इसी बीच बिलासपुर पुलिस रेंज में लगभग आधा दर्जन ASP और DSP रैंक के अधिकारी ऐसे बताए जा रहे हैं, जो बारबार घूमफिरकर यहीं पदस्थ हो जाते हैं। समयसमय पर इनकी पोस्टिंग बिलासपुर, जांजगीरचांपा या गौरेलापेंड्रा जैसे जिलों में होती रही है, जो सभी इसी रेंज के अंतर्गत आते हैं।

राजनीतिक पकड़, बिलासपुर रेंज में स्थायी पोस्टिंग

सूत्र बताते हैं कि जिले में पदस्थ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का मायका और ससुराल दोनों ही बिलासपुर शहर में स्थित हैं। इसके बावजूद वे वर्षों से यहीं पदस्थ हैं। चर्चा है कि राजनीतिक रसूख और मजबूत पहुंच के कारण ऐसे अधिकारियों को बिलासपुर पुलिस रेंज के इर्दगिर्द पोस्टिंग मिल जाती है , जबकि विभागीय नियमों के अनुसार पुलिस अधिकारियों को समयसमय पर संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी सेवाएं देनी होती हैं।

बताया जाता है कि चाहे प्रमोशन हो या तबादला, ये अधिकारी किसी किसी रूप में बिलासपुर पुलिस रेंज के भीतर ही अपनी जगह बना लेते हैं। कभी आईजी रेंज कार्यालय, कभी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, तो कभी जिला स्तर की जिम्मेदारीइनकी पदस्थापना अविभाजित बिलासपुर और वर्तमान बिलासपुर पुलिस रेंज के इर्दगिर्द ही सिमटी रहती है।

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