
बिलासपुर। सरकंडा थाना क्षेत्र के राजकिशोर नगर में सराफा कारोबारी संतोष तिवारी से 3.35 करोड़ रुपये की लूट के मामले में पुलिस ने तेज और समन्वित कार्रवाई कर फरार आरोपियों तक पहुंच बनाई। पीछा करते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस उत्तर प्रदेश पहुंची, जहां मिर्जापुर में संयुक्त कार्रवाई के दौरान शॉर्ट एनकाउंटर हुआ।
गोली लगने के बाद किया सरेंडर
भाग रहे बदमाशों का जब यूपी पुलिस ने पीछा करना शुरू किया तो बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो बदमाश के पैर में गोली लगी। इसके बाद कार सवार सभी चारों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। फिलहाल सभी आरोपी यूपी पुलिस के कस्टडी में है और छत्तीसगढ़ पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर उन्हें लेकर बिलासपुर जाएगी। हालांकि, पुलिस ने अभी यह नहीं बताया है कि लुटेरों के पास से कितना माल बरामद हुआ है।
इस मुठभेड़ में मुख्य आरोपी विजय लाम्बा और उसके साथी के पैर में गोली लगी, जिससे वे घायल हो गए। वहीं, अन्य आरोपियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। यूपी पुलिस आज इस मामले का विस्तृत खुलासा मिर्जापुर में करेगी।
वारदात के बाद ‘get-set-go’ मोड में आई पुलिस
बिलासपुर पुलिस घटना के तुरंत बाद पुलिस महकमा get-set-go रणनीति के तहत सक्रिय हो गया। 10 विशेष टीमें गठित कर अलग–अलग एंगल से जांच शुरू की गई। बीट स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों को तत्काल सक्रिय कर जमीनी सूचनाएं जुटाई गईं।
ग्राम उरतुम के पास लूटी गई कार की बरामदगी के बाद जांच को गति मिली। शहर और आउटर क्षेत्रों के सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। टॉवर डंप डाटा का विश्लेषण, संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान और फिंगरप्रिंट का नेफिस सर्वर से मिलान जैसे तकनीकी कदम उठाए गए।
चोरी की गाड़ियों से रची गई साजिश
जांच में सामने आया कि वारदात में प्रयुक्त बाइक और कार दोनों चोरी की थीं। बाइक अंबिकापुर में पदस्थ नगर सैनिक राकेश चौबे के नाम दर्ज थी, जिसे 13 फरवरी को मैनपाट से चुराया गया था। वहीं सफेद इको वैन घटना से एक दिन पहले अकलतरा थाना क्षेत्र से चोरी की गई थी।
सीसीटीवी विश्लेषण में यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी स्कॉर्पियो से कारोबारी का पीछा कर रहे थे और बाद में उसी वाहन से फरार हुए।
एसएसपी रजनेश सिंह की सक्रिय मॉनिटरिंग
छुट्टी पर रहने के बावजूद एसएसपी रजनेश सिंह लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहे और जांच की निगरानी करते रहे। स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारण और बेहतर टीम समन्वय के कारण कार्रवाई लगातार प्रभावी रही। आईजी स्तर पर भी सुपरविजन होता रहा, लेकिन जिला स्तर पर रणनीतिक नेतृत्व और फील्ड एक्शन की कमान एसएसपी के मार्गदर्शन में संचालित होती रही। इससे पहले भी कई बड़े घटनाक्रमों में उनकी त्वरित निर्णय क्षमता और सख्त मॉनिटरिंग की शैली सामने आई है।
अंतरराज्यीय कार्रवाई और मुठभेड़
तकनीकी इनपुट साझा कर उत्तर प्रदेश पुलिस से सहयोग लिया गया। मिर्जापुर में संदिग्ध वाहन का पीछा करते समय आरोपियों द्वारा कथित फायरिंग की गई, जिस पर जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी। इसके बाद अन्य आरोपियों ने सरेंडर कर दिया।
बीट सिस्टम और हाईटेक कवायद की सफलता
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस का प्रभावी बीट सिस्टम और हाईटेक पुलिसिंग मॉडल परिणाम देता नजर आया। बड़ी लूट के बाद जिस तेजी से पुलिस टीमों ने केस को हैंडल किया और get-set-go की तर्ज पर आरोपियों तक पहुंच बनाई, उससे यह स्पष्ट है कि बीट आधारित जमीनी नेटवर्क और डिजिटल सर्विलांस की संयुक्त कवायद सफल रही।
स्थानीय इंटेलिजेंस, तकनीकी विश्लेषण और अंतरराज्यीय समन्वय के संयोजन ने जांच को निर्णायक बनाया।
आगे की प्रक्रिया
मिर्जापुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके बाद बिलासपुर पुलिस उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आएगी। लूटे गए सोने और नकदी की बरामदगी को लेकर आधिकारिक पुष्टि शेष है।
3.35 करोड़ की इस बड़ी वारदात के बाद हुई त्वरित और समन्वित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि बिलासपुर में कानून–व्यवस्था को लेकर पुलिस तंत्र सक्रिय, तकनीक–सक्षम और परिणामोन्मुख है।

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