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कोरबा: रजगामार सरपंच की मनमानी पर बड़ा एक्शन, CEO ने सोसायटी भवन निर्माण पर लगाई रोक

कोरबा। जनपद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत रजगामार में नवीन शासकीय उचित मूल्य दुकान (सोसायटी भवन) के निर्माण स्थल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरपंच की मनमानी और ग्रामीणों के भारी विरोध को देखते हुए जनपद पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने निर्माण कार्य पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है।

🚨 विवाद के 3 मुख्य कारण: क्यों रुक्का निर्माण?

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स्थल में फेरबदल: यह सोसायटी भवन मूल रूप से आश्रित ग्राम ओमपुर के लिए स्वीकृत हुआ था। लेकिन वर्तमान सरपंच हरि सिंह राठिया और सचिव भारत लाल श्रीवास ने 15 वार्ड पंचों और ग्रामीणों की सहमति के बिना, इसे छुईढोढ़ा में एक किसान की निजी भूमि पर बनवाना शुरू कर दिया।

स्कूल की दीवार तोड़ी: सरपंच पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी वैध प्रशासनिक अनुमति के सरकारी स्कूल की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) को तुड़वा दिया, जिससे राजस्व को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

असुरक्षित स्थल: उपसरपंच और पंचों के अनुसार, नए चयनित स्थल पर खाद्यान्न की सुरक्षा, ग्रामीणों के आवागमन में दिक्कत और स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा है। ग्रामीण इसे ‘मेन क्लब परिसर’ में बनाने की मांग कर रहे हैं।

🏛️ जनपद सीईओ का कड़ा रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद सीईओ खगेश कुमार निर्मलकर ने सरपंच-सचिव को आधिकारिक पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि:

“उक्त निर्माण कार्य की औचित्यपूर्ण जांच और प्रतिवेदन (Report) प्राप्त होने तक काम को तुरंत बंद रखा जाए। आगामी आदेश के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

  ???? युक्तियुक्तकरण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक!

👥 सरपंच पर लगे अन्य गंभीर आरोप

ग्राम पंचायत की उपसरपंच श्रीमती पूनम चौरसिया और जनपद सदस्य उषा देवी कुर्रे सहित कई वार्ड पंचों ने सरपंच पर भेदभाव और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं:

राजनीतिक उपेक्षा: सरपंच द्वारा भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों के वार्डों के विकास कार्य को दुर्भावनावश रोका जा रहा है। ओमपुर में स्वीकृत दो नवीन आंगनबाड़ियों का काम भी अधूरा छोड़ दिया गया है।

फर्जी ग्राम सभा: छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर आयोजित ग्राम सभा में ग्रामीणों ने स्थल बदलने का विरोध किया, लेकिन सचिव ने कार्यवाही पंजी में ग्रामीणों का कोई प्रस्ताव दर्ज नहीं किया।

बिना कार्य के राशि आहरण: आरोप है कि डेढ़ साल के कार्यकाल में 15वें वित्त मद और मूलभूत मद से लाखों रुपये का आहरण बिना कोई वास्तविक कार्य कराए ही कर लिया गया है।

भुगतान रोकना: कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद पिछले कार्यकाल के निर्माण कार्यों का भुगतान अटका कर रखा गया है।

🎯 निष्कर्ष

रजगामार पंचायत के बैंक खाते में करोड़ों रुपये होने के बावजूद विकास कार्यों में गतिरोध और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश है। अब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की नजरें प्रशासन की आगामी जांच रिपोर्ट और कार्रवाई पर टिकी हैं।

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प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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