प्रशासन का आदेश बेअसर, नो एंट्री के बाद भी शहर से गुजर रही गाड़ियां

कोरबा, 5 नवम्बर। क्या आदेश जारी कर देना ही महत्वपूर्ण है, या फिर उस पर अमल कराना भी जरूरी है। कटघोरा में फेस्टिवल सीजन के मद्देनजर एसडीएम द्वारा 7 दिनों के लिए शहर के भीतर से ट्रैफिक को डायवर्ट करने का आदेश जारी किया गया। इसके बावजूद शहर के भीतर से ही होकर भारी गाडियां चल रही हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर निगरानी कौन करेगा और अगर व्यवस्था बिगड़ी है तो लापरवाही बरतने वाले चालकों पर एक्शन क्यों नहीं?
तीन दिशाओं की गाडियां कटघोरा से होकर गुजरती है। ऐसे में यह पब्लिक से लेकर गुड्स ट्रांसपोर्ट का बड़ा जंक्शन प्वाइंट है। छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मध्यप्रदेश, झारखंड, उत्तरप्रदेश और बिहार के लिए रोड कनेक्टिविटी के मामले में जिले का कटघोरा सब डिविजन महत्वपूर्ण है। पिछले वर्षों में इसी बात को ध्यान में रखते हुए कटघोरा में अंबिकापुर और बिलासपुर मार्ग के लिए बायपास का निर्माण कराया गया, ताकि ट्रैफिक के आंतरिक दबाव को कम किया जा सके। नवरात्र के बाद दीपावली और छठ पूजा तक के लिए प्रशासन ने बड़ी गाडियों को शहर के भीतर से निकालने पर रोक लगाई है। कहा गया था कि फेस्टिवल सीजन में शहर में व्यस्तता बढ़ेगी और ऐसे में बड़ी गाडियों के चलने से दिक्कतें होना स्वाभाविक है, इसलिए इस सीजन के दौरान भारी वाहनों का संचालन शहर के बाहर बायपास से ही होगा।
आदेश जारी करने के साथ नियंत्रण भी किया जाना था, लेकिन कहीं न कहीं इसकी कमी साफ तौर पर नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि मार्केट की भीड़भाड़ के बावजूद बड़े वाहन कटघोरा की मुख्य सडक से पार हो रहे हैं और अपने गंतव्य की दिशा पकड़ रहे हैं। लगातार इस प्रकार के नजारे सामने आ रहे हैं और लोग इसे खुली आंखों से देख रहे हैं। कहा जा रहा है कि जिस दृष्टि से भारी वाहनों के मामले में क्षेत्र को नो एंट्री जोन के तौर पर घोषित किया गया, उसकी पूर्ति होती नजर नहीं आ रही है। लोगों का कहना है कि अगर भारी गाडियां इस रास्ते से होकर गुजर रही है तो नो एंट्री कहां? कहा जा रहा है कि अगर जब सब कुछ पहले के तरह रहना है तो फिर इस तरह का आदेश जारी किए जाने का औचित्य क्या है?

Live Cricket Info
