
रायपुर : छत्तीसगढ़ में श्रमिकों और मजदूरों के अधिकारों को लेकर मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम-2026 लागू कर दिए गए हैं। नए नियमों के तहत अब कर्मचारियों के काम के घंटे, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम भुगतान और वेतन कटौती को लेकर महत्वपूर्ण प्रावधान तय किए गए हैं। सामान्य कार्यदिवस 8 घंटे का होगा और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नियमित काम नहीं कराया जा सकेगा। इसके साथ ही प्रत्येक कर्मचारी को सप्ताह में कम से कम एक दिन का अवकाश देना अनिवार्य होगा।
8 घंटे से अधिक काम पर मिलेगा ओवरटाइम
नए नियमों के अनुसार दैनिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए सामान्य कार्यदिवस 8 घंटे निर्धारित किया गया है। नियमित कार्य अवधि सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नहीं होगी। यदि किसी कर्मचारी से निर्धारित समय से अधिक काम कराया जाता है तो उसे नियमों के अनुसार ओवरटाइम का भुगतान करना होगा। सप्ताह में कम से कम एक दिन का विश्राम देना भी जरूरी होगा।
छुट्टी के दिन काम कराया तो वैकल्पिक अवकाश भी देना होगा
यदि किसी कर्मचारी से साप्ताहिक अवकाश के दिन काम कराया जाता है तो उसे बदले में वैकल्पिक अवकाश देना होगा। इसके साथ ही उस दिन किए गए काम का भुगतान ओवरटाइम दर से किया जाएगा। नियमों के मुताबिक किसी श्रमिक से बिना पूरे दिन का विश्राम दिए लगातार 10 दिन से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा।
ठेका श्रमिकों की मजदूरी के लिए संस्थान भी जिम्मेदार
नए प्रावधानों में ठेका श्रमिकों के वेतन भुगतान की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की गई है। जिस संस्थान या कंपनी में ठेका श्रमिक काम कर रहे हैं, वहां प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ठेकेदार को समय पर भुगतान मिले। इसका उद्देश्य यह है कि ठेका श्रमिकों की मजदूरी निर्धारित समय पर अटके नहीं और उन्हें समय पर भुगतान मिल सके।
वेतन से 50 प्रतिशत से ज्यादा कटौती नहीं
नियमों में वेतन से होने वाली कटौती की सीमा भी तय की गई है। किसी कर्मचारी के वेतन से अधिकृत कटौतियां एक महीने में कुल वेतन के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेंगी। यदि किसी कारण से कटौती की राशि इस सीमा से अधिक होती है तो अतिरिक्त राशि एक ही महीने में काटने के बजाय अगले महीनों में किस्तों के रूप में समायोजित करनी होगी।
परिवार के सदस्यों को नामांकित करने की सुविधा
नई मजदूरी संहिता में कर्मचारियों के परिवार के हितों को ध्यान में रखते हुए नामांकन का प्रावधान भी रखा गया है। कर्मचारी अपने परिवार के सदस्यों को नामांकित कर सकेंगे। कर्मचारी की मृत्यु के बाद मिलने वाली राशि नामांकित व्यक्ति को मिलेगी। विवाह या परिवार में बदलाव होने पर नामांकन अपडेट करने की सुविधा भी दी गई है।
श्रमिकों के अधिकारों को कानूनी आधार
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के अनुसार, नई मजदूरी संहिता में श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर नियम तय किए गए हैं। इससे श्रमिकों के वेतन संबंधी अधिकारों का संरक्षण होगा और नियोक्ताओं की वैधानिक जिम्मेदारियां भी स्पष्ट होंगी। नए नियमों का उद्देश्य मजदूरों को समय पर वेतन, निर्धारित कार्य अवधि, साप्ताहिक विश्राम और उचित भुगतान सुनिश्चित करना है।
इन प्रावधानों के लागू होने से नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ ठेका श्रमिकों के लिए भी वेतन और कार्य परिस्थितियों को लेकर जवाबदेही तय होगी। अब इन नियमों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी पालन होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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