मौसम की मार से किसानों की बढ़ेगी मुश्किलें ! छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट, धान कटाई को लेकर कृषि विश्वविद्यालय की बड़ी सलाह
25 से 29 अक्टूबर तक मौसम बिगड़ने का अनुमान, कटी फसल सुरक्षित रखने और खेतों से पानी निकालने की तैयारी करें किसान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आने वाले दिनों में मौसम किसानों की चिंता बढ़ा सकता है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताई गई है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने 25 से 29 अक्टूबर तक के मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों के लिए कृषि सलाह जारी की है। इसमें धान की कटाई, खेतों में जल निकासी, सब्जियों की सुरक्षा और पशुओं की देखभाल को लेकर विशेष सावधानी बरतने कहा गया है।
विश्वविद्यालय के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 25 अक्टूबर को बस्तर संभाग के बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की आशंका है। बीजापुर, कोंडागांव और नारायणपुर सहित अन्य क्षेत्रों में भी बारिश हो सकती है। रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, दुर्ग और राजनांदगांव जिलों में भी कुछ स्थानों पर बारिश का अनुमान है।
26 अक्टूबर को दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बिलासपुर, मुंगेली, बेमेतरा, कबीरधाम, बस्तर और बीजापुर जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है।
27 अक्टूबर को सरगुजा, जशपुर, जांजगीर-चांपा और सक्ती जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। वहीं रायपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और अन्य जिलों में भी बारिश का अनुमान है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में बारिश की संभावना बनी रह सकती है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका भी जताई गई है।
धान कटाई को लेकर किसानों के लिए अहम सलाह
मौसम को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों में धान की फसल अभी पकने की अवस्था में है, वहां अगले दो से चार दिनों तक कटाई का काम टाल दें। जिन किसानों ने फसल काट ली है, वे कटी हुई फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर रखें, ताकि बारिश से नुकसान न हो।
खेतों में अतिरिक्त पानी जमा होने से रोकने के लिए निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा गया है। लगातार नमी और बारिश के कारण फसल में कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो मौसम साफ होने पर ही आवश्यकतानुसार कीटनाशक या कवकनाशक का छिड़काव करें।
सब्जियों और फलदार पौधों की भी करें सुरक्षा
बारिश और तेज हवा की आशंका के मद्देनजर किसानों को बेल वाली सब्जियों, जैसे करेला, लौकी और अन्य कद्दूवर्गीय फसलों के लिए सहारे की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। जिन पौधों पर फल आ चुके हैं, उन्हें बांस का सहारा देने को कहा गया है। खेतों में जल निकासी सुनिश्चित करने के साथ जरूरत के अनुसार पौधों की निगरानी भी जरूरी है।
रबी की सब्जियों में फूलगोभी, ब्रोकली, चुकंदर, पछेती खीरा और पछेती करेला जैसी फसलों की बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू करने की सलाह दी गई है। रबी की फसल लेने वाले किसान नवंबर के प्रथम सप्ताह से बुवाई की तैयारी कर सकते हैं।
पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह
मौसम विभाग के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए पशुपालकों से कहा गया है कि बारिश के दौरान पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखें। वज्रपात की आशंका के चलते पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे आश्रय न लेने दें। पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।
किसानों के लिए सतर्क रहने का समय
धान कटाई के इस महत्वपूर्ण दौर में बारिश से फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने, कटी फसल को सुरक्षित रखने और खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत है। कृषि विश्वविद्यालय की सलाह के अनुसार समय रहते सावधानी बरतने से संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

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