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एसईसीएल खदान में गार्डों को बंधक बनाकर लोहे के सामान और पाइप चोरी मामले में 2 आरोपी गिरफ्तार

कोरबा, 3 नवम्बर। जिले में कबाड़ कारोबार के खिलाफ लगातार कार्रवाई के दावों के बीच एस ई सी एल की बांकी-4 खदान में सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाकर लोहे के सामान और पाइप चोरी करने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बांकीमोंगरा पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने उनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल पिकअप वाहन, गैस कटर, ऑक्सीजन सिलेंडर और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। हालांकि, घटना में शामिल बताए जा रहे 10 से 12 नकाबपोश बदमाशों में से अब तक केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक, 26 और 27 अक्टूबर की दरम्यानी रात करीब एक बजे 10 से 12 नकाबपोश बदमाश एसईसीएल की बांकी-4 खदान परिसर में घुसे थे। ड्यूटी पर तैनात चौकीदारों को बंधक बनाकर उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए। इसके बाद बदमाशों ने गैस कटर की मदद से स्टोर में रखे लोहे के रैक और एसईसीएल संपत्ति के पाइप काटे और करीब 28 हजार रुपये कीमत का सामान लेकर फरार हो गए। जाते समय बदमाश चौकीदारों के मोबाइल फोन वापस कर गए थे। एसईसीएल सुरक्षा गार्ड व्यासनारायण चौहान की रिपोर्ट पर 28 अक्टूबर को बांकीमोंगरा थाने में अपराध क्रमांक 223/2026 दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।

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पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पिकअप चालक राहुल विश्वकर्मा और कबाड़ दुकान संचालक आकाश साहू को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में दोनों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। डकैती से प्राप्त संपत्ति के निपटान और खरीद-बिक्री में भूमिका सामने आने पर मामले में बीएनएस की धारा 317(3) और 317(5) भी जोड़ी गई। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पिकअप वाहन क्रमांक सीजी 12 बीजे 6180, एक गैस कटर, एक ऑक्सीजन सिलेंडर और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

वारदात में 10 से 12 नकाबपोश बदमाशों के शामिल होने की बात सामने आई है, जबकि पुलिस अब तक केवल दो आरोपियों को ही गिरफ्तार कर सकी है। ऐसे में इस गिरोह के सरगना की पहचान और कथित अवैध कारोबार को संरक्षण देने वालों की भूमिका का खुलासा होना भी जरूरी है। दूसरी ओर,एसईसीएल की बांकी खदान में जिस तरह कबाड़ चोर बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं, उससे साफ है कि उन्हें कानून का कितना डर है। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई केवल छोटे आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जरूरत इस बात की है कि जांच को आगे बढ़ाकर पूरे नेटवर्क, गिरोह के सरगना और चोरी के माल की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों तक पहुंचा जाए। महज छोटी मछलियों को पकड़कर कार्रवाई का श्रेय लेने के बजाय पुलिस को इस अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचना होगा।

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इस घटना ने जिले में कबाड़ कारोबार पर नियंत्रण और एसईसीएल की खदानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। कबाड़ियों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई होती रही है, लेकिन इसके बावजूद खदान परिसर में घुसकर सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाने और गैस कटर से लोहे का सामान काटकर ले जाने जैसी वारदातें होना गंभीर चिंता का विषय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस की सख्ती और लगातार कार्रवाई के दावों के बावजूद कबाड़ कारोबारी किसके संरक्षण में अपना कारोबार चला रहे हैं ? पुलिस कप्तान के सख्त निर्देशों के बाद भी क्या जमीनी स्तर पर पुलिस की टीमें कबाड़ कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही हैं ? या फिर जिले की कानून व्यवस्था पर कबाड़ माफिया भारी पड़ रहे हैं ? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है। बांकी-4 खदान की इस घटना ने न केवल खदानों की सुरक्षा व्यवस्था, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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