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100 हफ्तों की जंग… नशे के जाल से करोड़ों सपनों को बचाने की चुनौती

नई दिल्ली। नशे के जाल में फंसे देश के करोड़ों युवाओं को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुहिम छेड़ दी है। यह पहल ऐसे समय में की गई है, जब देश के सामने नशीले पदार्थों की बढ़ती उपलब्धता और तस्करी गंभीर चुनौती बन चुकी है।

विदेश से तस्करी के जरिए आने वाली हेरोइन, मेथामफेटामीन, कोकीन और एमडीएमए जैसे सिंथेटिक ड्रग्स के साथ-साथ देश में अवैध रूप से तैयार या आसानी से उपलब्ध शराब, गांजा, अफीम और कुछ नशीली दवाएं भी युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं। देश में नशे की स्थिति पर उपलब्ध सबसे बड़े राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार करोड़ों लोग किसी न किसी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन करते हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों और महिलाओं में भी बढ़ती लत तथा मानसिक तनाव, बेरोजगारी और इंटरनेट मीडिया पर नशे के बढ़ते ग्लैमर ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है।

राष्ट्रीय सर्वे क्या कहता है?

देश में नशे की स्थिति पर उपलब्ध सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सबसे व्यापक अध्ययन ‘मैग्नीट्यूड आफ सब्स्टेंस यूज इन इंडिया’ (2019) के अनुसार लगभग 16 करोड़ लोग शराब, 3.1 करोड़ लोग कैनाबिस (गांजा आदि) और करीब 2.3 करोड़ लोग ओपिओइड (अफीम, हेरोइन सहित) का सेवन करते हैं।

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प्रखर भूमि

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