नवोदय विद्यालय में शिक्षक की बर्बरता, गाना गा रहे छात्रों को लोहे की रॉड से पीटा, स्टाफ भी घायल

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक शिक्षक ने अनुशासन के नाम पर सात छात्रों को लोहे की रॉड से बेरहमी से पीट दिया। बिजली गुल होने पर गाना गा रहे छात्रों पर हुए इस हमले में एक स्टाफ सदस्य भी घायल हो गया। घटना के बाद अभिभावकों में रोष है, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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जगदलपुर (धरमपुरा)। शहर के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चों के साथ एक शिक्षक द्वारा की गई क्रूरता का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, स्कूल के भूगोल शिक्षक और हॉस्टल वार्डन सौरभ अवस्थी ने मामूली बात पर सात छात्रों की लोहे की रॉड से बेरहमी से पिटाई कर दी। जब एक स्टाफ मेंबर ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो शिक्षक ने उसे भी नहीं बख्शा और उसी रॉड से हमला कर दिया।

बिजली गुल थी, बच्चे गा रहे थे गाना – भड़के शिक्षक

घटना मंगलवार देर रात की बताई जा रही है। हॉस्टल में बिजली कटने के बाद छात्र आपस में बैठकर गाना गा रहे थे। इसी दौरान सौरभ अवस्थी वहां पहुंचे और छात्रों को शांति भंग करने के आरोप में गालियां देते हुए लोहे की रॉड से मारना शुरू कर दिया। पिटाई के दौरान कई बच्चों को गंभीर चोटें आईं हैं, वहीं स्टाफ सदस्य नीलेश भी घायल हो गए।

अभिभावकों का आक्रोश – बच्चों पर ऐसा जुल्म क्यों?

घटना की जानकारी मिलते ही बुधवार सुबह बड़ी संख्या में अभिभावक विद्यालय पहुंचे। बच्चों की हालत देखकर परिजन आक्रोशित हो उठे। एक छात्र की माँ ने रोते हुए कहा,

“बिजली नहीं थी तो बच्चे गा रहे थे, इसमें इतनी मार-कुटाई क्यों? मेरे बेटे की कमर पर गहरी चोट है, क्या यही अनुशासन है?”

पहले भी की गई थी शिकायतें, पर कार्रवाई नहीं

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छात्रों का कहना है कि सौरभ अवस्थी का व्यवहार हमेशा से ही कठोर और अपमानजनक रहा है। इससे पहले भी उनके खिलाफ शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रबंधन ने हमेशा मामले को दबाने की कोशिश की। अब जब बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं, तब भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

प्रशासन मौन, न DEO ने लिया संज्ञान, न कोई जांच शुरू

घटना के 24 घंटे बाद तक जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। न तो विद्यालय में जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है और न ही घायल छात्रों से कोई पूछताछ की गई है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या शिक्षा विभाग ऐसे मामलों में जानबूझकर चुप्पी साध लेता है?

प्रबंधन पर गंभीर आरोप – दबाया जा रहा है मामला

छात्रों और उनके परिजनों का आरोप है कि विद्यालय में इस तरह की घटनाएं पहले भी हुई हैं, लेकिन हर बार उन्हें छुपा दिया जाता है। परिजनों ने स्कूल प्रशासन और शिक्षक पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए दोषी के खिलाफ FIR और सस्पेंशन की मांग की है।

धरना प्रदर्शन की चेतावनी

अभिभावकों ने साफ कर दिया है कि अगर शीघ्र सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो वे शिक्षा विभाग के दफ्तर के बाहर धरना देंगे। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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